Pappu Yadav Arrest: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने शुक्रवार रात देर रात गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई लगभग 31 साल पुराने एक आपराधिक मामले में पटना की विशेष अदालत के जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर हुई.
मामला क्या है?
यह पूरा विवाद 1995 का है, जब पटना के गर्दनीबाग थाने में FIR दर्ज की गई थी (FIR संख्या 552/1995). शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि पप्पू यादव ने उनके मकान को धोखे से किराए पर लिया. शुरू में इसे व्यक्तिगत उपयोग के लिए बताया गया, लेकिन बाद में उन्होंने इसे अपना कार्यालय बना लिया और संपत्ति पर कब्जा कर लिया. इस धोखाधड़ी के आरोप में धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120B (पुरानी IPC के तहत) लगाई गई थी.
अदालत की कार्रवाई
गिरफ्तारी के दौरान क्या हुआ?
पुलिस के पहुंचने पर पप्पू यादव के समर्थकों ने विरोध जताया और तीखी बहस हुई. कुछ देर तक हंगामा चला. अंततः पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले गई. गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर आई, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. वे रात पुलिस हिरासत में बिताकर शनिवार सुबह कोर्ट में पेश होने वाले थे.
पप्पू यादव का बयान
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव ने दावा किया कि यह कार्रवाई राजनीतिक साजिश है. उन्होंने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए कि वे उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं. उन्होंने NEET छात्रा के मामले में लड़ाई लड़ने के कारण धमकी मिलने की बात कही. पप्पू यादव ने कहा कि वे फांसी पर चढ़ने को तैयार हैं, लेकिन सच के रास्ते से नहीं हटेंगे.
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उन्होंने दावा किया कि सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों से उन्हें लगा कि कोई हमला करने आया है. यह मामला बिहार की सियासत में नया मोड़ लाया है, खासकर जब पप्पू यादव हाल के समय में कुछ मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. अदालत की यह सख्त कार्रवाई लंबित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की तेजी को दर्शाती है.