नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने एक ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में बनने वाले अधिकांश नियम और कानून ब्राह्मण समुदाय के विरुद्ध जा रहे हैं.
उनका कहना था कि संवैधानिक व्यवस्था में ब्राह्मणों को लगातार पीछे धकेला जा रहा है. उन्होंने इसकी वजह बताई कि ब्राह्मण समाज संगठित नहीं है और वोट बैंक के रूप में मजबूत नहीं माना जाता, जबकि अन्य समुदाय एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं.
गोपाल भार्गव ने आगे कहा कि पुराने समय से ब्राह्मण धर्म के संरक्षक और प्रदर्शक रहे हैं, इसलिए अब लोग सनातन धर्म पर ही हमला करने लगे हैं. उन्होंने ब्राह्मणों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि विपरीत परिस्थितियों में धर्म की रक्षा के लिए एक होना जरूरी है.
यह बयान सागर जिले में आयोजित ब्राह्मण समाज के मेधावी सम्मान समारोह के दौरान आया. वहाँ 266 मेधावी छात्र-छात्राओं को कौटिल्य सम्मान से नवाजा गया. कार्यक्रम में विप्र वैवाहिक स्मारिका (ब्राह्मण समाज की वैवाहिक पत्रिका) का विमोचन भी हुआ, जिसे गोपाल भार्गव ने समाज के लिए फायदेमंद कदम बताया.
समारोह की अध्यक्षता एसकेवीएन विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति डॉ. अनिल तिवारी ने की. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा सबकी भलाई के लिए काम करता रहा है, लेकिन किसी सरकार या राजनीतिक दल द्वारा उनका हित नहीं सोचा जाता. ऐसे आयोजन समाज की एकता दिखाने और सरकार को चेताने का माध्यम हैं.
इससे पहले मध्य प्रदेश में कुछ आईएएस अधिकारियों के ब्राह्मणों पर विवादित बयानों (जैसे संतोष वर्मा और नियाज खान के) ने भी चर्चा बटोरी थी, जिससे यह मुद्दा और गरमा गया है. गोपाल भार्गव का यह बयान ब्राह्मण समाज में एकता और जागरूकता की मांग को मजबूत कर रहा है.