Congress Tharoor Clash: क्या PM मोदी ने शशि थरूर को अमेरिका भेजकर गांधी परिवार की नींद उड़ा दी है? क्या गांधी परिवार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है? शशि थरूर और PM मोदी की बढ़ती दोस्ती के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं? क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया और हिमंता बिस्वा सरमा की तरह राहुल गांधी की नेतृत्व-हीन क्षमता के कारण शशि थरूर का विकेट भी गिरना तय है? क्योंकि शशि थरूर और PM मोदी के बीच यह दोस्ताना पिछले कुछ महीनों में बढ़ गया कि अब सिर्फ ऐलान होना बाकी है!
थरूर ने की थी PM मोदी की तारीफ

“ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, जब ट्रंप ने सीज़फायर का ऐलान किया, तब कुछ कांग्रेसी नेताओं ने इंदिरा गांधी को देश की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री बताया. शशि थरूर से जब यही सवाल पूछा गया तो वे कहते हैं. “आज के पाकिस्तान की स्थिति अलग है! 1971 में बांग्लादेश के अलग होने का एक नैतिक कारण था! आज की परिस्थिति वैसी नहीं है! क्या आप चाहते हैं युद्ध लंबा और खूनी हो? क्या यह आज के भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है? शायद नहीं!”
थरूरी को PM मोदी ने सौंपी है बड़ी जिम्मेदारी
हालांकि शशि थरूर अकेले नहीं हैं जो इस रिश्ते को निभा रहे हैं. उन्हें PM मोदी ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है! दरअसल पाकिस्तान की झूठ वाली फ़ैक्ट्री को तबाह करने की जिम्मेदारी PM ने सांसद थरूर को दी है! BJP ने एक पैनल तैयार किया है, जिसमें कुल 49 सांसद हैं. एक टीम में सात सांसदों को रखा गया है! सात टीमों का एक लीडर बनाया गया है. ये टीमें 34 देशों में जाएंगी और पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब करेंगी. विश्व मंच पर बताने की कोशिश होगी कि पाकिस्तान ही आतंकियों को पैदा करता है! एक टीम का लीडर शशि थरूर को बनाया गया है! शशि थरूर के साथ उस टीम में तेजस्वी सूर्या को भी रखा गया है! शशि थरूर की टीम अमेरिका, पनामा, कनाडा, ब्राज़ील और कोलंबिया जाएगी! हालांकि इस एक पैनल में असदुद्दीन ओवैसी (Asduddin Owaisi) का नाम भी है! तो क्या इसका मतलब कि ओवैसी भी BJP में आने वाले हैं?
राहुल के नेतृत्व से खुश नहीं है कांग्रेस!
सवाल फिर गूंज रहा है कि क्या राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व से कांग्रेस (Congress) खुश नहीं है? क्योंकि राहुल गांधी की आलोचना शशि थरूर ने खुलकर की थी. कुछ दिनों पहले गुजरात में कांग्रेस ने CWC की बैठक बुलाई. बैठक में शशि थरूर ने मंच से भाषण दिया कि
“कांग्रेस को देश की जनता के सामने सकारात्मक विज़न रखना होगा. हमें जनता को बताना होगा कि हमारे पास क्या रोडमैप है? अभी तक हम नकारात्मक कैंपेन ही कर रहे हैं और BJP को गलत बता रहे हैं.”
यह बयान राहुल गांधी पर बड़ा हमला समझा गया! लेकिन बात इससे बड़ी है: राहुल गांधी खुद कांग्रेस पर कब्जा जमाए बैठे हैं, इसलिए कई दिग्गज नेताओं को कांग्रेस छोड़ BJP में आना पड़ता है! कांग्रेस के चार बार के सांसद शशि थरूर इन दिनों पार्टी में साइडलाइन चल रहे हैं. न ही थरूर के पास कांग्रेस संगठन में कोई अहम पद है और न ही पार्टी उन्हें कोई रोल दे रही है. पिछले दिनों कांग्रेस नेतृत्व ने अपने संगठन में कई अहम बदलाव किए हैं, दो महासचिव नियुक्त किए गए और कई राज्यों के प्रभारी बदले गए. इस बदलाव में भी थरूर को कोई पद नहीं मिला. इसके चलते ही शशि थरूर नाराज़ माने जा रहे हैं.
राहुल गांधी से मिले थे थरूर
शशि थरूर ने 18 फरवरी को राहुल गांधी से मुलाकात की थी. उन्होंने पार्टी में किनारे किए जाने पर राहुल से नाराज़गी जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें संसद में महत्वपूर्ण बहसों में बोलने का मौका नहीं मिलता, पार्टी में उन्हें इग्नोर किया जा रहा है. राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान थरूर ने अपनी भूमिका को लेकर सवाल किया था. वे केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव (Kerla Election 2026) के लिए अपना चेहरा पेश कराना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय के. सी. वेणुगोपाल (K.C. Venugopal) को अहमियत दे रही है. माना जाता है कि राहुल गांधी ने थरूर को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करने की परंपरा नहीं है. थरूर युवा कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने को भी तैयार थे, लेकिन राहुल गांधी ने इस ऑफर पर भी आनाकानी कर दी. इस तरह से मायूसी हाथ लगने के बाद शशि थरूर की बेचैनी बढ़ रही है.
‘ऑल इंडिया प्रोफ़ेशनल कांग्रेस’ से भी थरूर की छुट्टी
शशि थरूर को ‘ऑल इंडिया प्रोफ़ेशनल कांग्रेस’ के प्रभारी पद से भी हटा दिया गया है. कांग्रेस का यह संगठन थरूर का ही तैयार किया हुआ है. राहुल गांधी के साथ मुलाकात में थरूर ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई. ‘मोदी लहर’ में लगातार तीन बार थरूर अपनी सीट जीतने में सफल रहे हैं, लेकिन पार्टी में उन्हें बड़ा मुकाम नहीं मिला है. केरल में अगले साल 2026 में विधानसभा चुनाव हैं और पिछले 9 साल से लेफ़्ट (Left) का क़ब्ज़ा है. राहुल गांधी के केरल से सांसद रहते हुए भी कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापसी नहीं कर सकी. कहानी इसलिए ज़रूरी है क्योंकि कांग्रेस का पुराना इतिहास है,वह क़ाबिल को मौका नहीं देती. कभी हिमंता के साथ यही हुआ, मेहनत उन्होंने की लेकिन CM किसी और को बना दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी इसलिए पीछे रखा गया ताकि राहुल गांधी की ताकत पार्टी में बनी रहे.
हाशिये पर हैं सचिन पायलट!
सचिन पायलट (Sachin Pilot) इसलिए हाशिए पर हैं कि कहीं राहुल गांधी से अच्छा भाषण न दे दें. इसलिए मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन जैसे थकेले नेताओं को आगे करते हैं ताकि राहुल गांधी के कद से किसी का कद पार्टी में न टकराए. शशि थरूर ने मल्लिकार्जुन के सामने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा, लेकिन गांधी परिवार अगर नहीं चाहता तो कोई कैसे बन जाएगा? यही कारण है कि मोदी-थरूर की दोस्ती गाढ़ी हो रही है. वे किसी भी वक्त BJP में आ सकते हैं? कहानी बड़ी होगी. केरल की सियासत बदल सकती है!