ED Jharkhand Police: रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण माहौल बन गया है. गुरुवार सुबह रांची पुलिस की एक टीम एयरपोर्ट रोड स्थित इस दफ्तर पहुंची, जहां पेयजल विभाग से जुड़े 23 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की जांच चल रही है.
यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई, जिसमें विभाग के पूर्व क्लर्क संतोष कुमार ने ED के दो अधिकारियों सहायक निदेशक प्रतीक और उनके सहायक शुभम पर 12 जनवरी को पूछताछ के दौरान मारपीट करने, सिर फोड़ने और सबूत मिटाने का आरोप लगाया है. संतोष कुमार ने दावा किया कि उन्हें जबरन बयान बदलने के लिए दबाव डाला गया और हमले के बाद अस्पताल में भी धमकियां दी गईं.
पुलिस टीम के पहुंचने पर ED कार्यालय की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया. सुबह करीब 6 बजे पुलिस पहुंची, लेकिन उस समय तक ED के ज्यादातर अधिकारी कार्यालय में नहीं थे, जिससे जांच में देरी हुई. ED पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संतोष कुमार खुद को चोट पहुंचाकर आए थे और कोई समन जारी नहीं किया गया था.
इस घटना पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इसे गंभीर बताते हुए दावा किया कि ED दफ्तर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार के महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं.
उन्होंने आशंका जताई कि पुलिस की इस कार्रवाई से सबूतों से छेड़छाड़ या नष्ट करने की कोशिश हो सकती है. मरांडी ने कहा कि झारखंड को पश्चिम बंगाल की तरह नहीं बनने देंगे. हेमंत जी, कान खोलकर सुन लीजिए... भ्रष्टाचार की सजा जरूर मिलेगी." उन्होंने केंद्र सरकार से केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग भी की.
इसी तरह, गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ममता बनर्जी की तर्ज पर जांच एजेंसियों पर दबाव बना रही है. उन्होंने भी सबूतों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि ईमानदार अधिकारियों को डराने-धमकाने की कोशिश हो रही है.
यह मामला राज्य में ED और राज्य सरकार के बीच बढ़ते टकराव को और उजागर करता है, जहां पहले भी जांच एजेंसियों पर हमले और झूठे मुकदमों के आरोप लग चुके हैं. फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे की जांच से कई नए खुलासे हो सकते हैं.