नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को आरक्षण सुधार कार्यकर्ता और यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. मामला सांसद चंद्रशेखर आजाद पर उनके कथित टिप्पणियों से जुड़ा है, जिसमें SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज है. जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत प्रथम दृष्टया अपराध बनता है.
इन प्रावधानों में एससी/एसटी समुदाय के सदस्य का अपमान या जाति के नाम से गाली देने का जिक्र है. कोर्ट ने याचिका को पोषणीय नहीं माना. विस्तृत आदेश बाद में आएगा. यह अजीत भारती के लिए दूसरा झटका है. इससे पहले 7 सितंबर को सत्र न्यायालय ने भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
मामला क्या है?
22 अगस्त को अजीत भारती के यूट्यूब लाइवस्ट्रीम के दौरान एक दर्शक ने टिप्पणी की थी कि उनकी बहन की शादी चंद्रशेखर आजाद से हो जाए तो आरक्षण खत्म हो जाएगा. इसके जवाब में भारती ने कहा था कि चंद्रशेखर को किसी सवर्ण की बेटी का हाथ मांगने लायक खुद को बनाना होगा.
इस टिप्पणी को लेकर आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध की शिकायत पर नॉर्थ एवेन्यू थाने में FIR दर्ज हुई. मामला SC/ST एक्ट, आईटी एक्ट की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया. अजीत भारती का कहना है कि उन्होंने जाति पूर्वाग्रह से नहीं, बल्कि अपनी बहन के अपमान का जवाब दिया था. उन्होंने जाति का नाम भी नहीं लिया
. पुलिस का तर्क है कि टिप्पणियां सार्वजनिक रूप से जाति का अपमान करती हैं. अजीत भारती आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. वे क्रीमी लेयर और सब-कैटेगरीजेशन जैसे मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब अजीत भारती को गिरफ्तारी का खतरा बना हुआ है.