लखनऊ: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तथा छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। दिल्ली में पुलिस कार्रवाई और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) के बाहर हिरासत में लिए जाने के विरोध में लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) दफ्तर के बाहर बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पोस्टर लगाए गए हैं।
इन पोस्टरों में मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के जंतर-मंतर पर दिखाए गए आक्रामक और जुझारू रूप को केंद्र में रखते हुए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है।
'सौम्य नहीं, जुझारू चेहरा': पोस्टर में छिपी भावनाएं
पोस्टर में 21 जुलाई 2026 को संसद से जंतर-मंतर तक हुए सपा के मार्च और पुलिस धक्का-मुक्की की तस्वीरों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। जब संसद के मानसून सत्र के दौरान सपा की महिला सांसद—डिंपल यादव, इकरा हसन और प्रिया सरोज बैनर लेकर सड़क पर उतरी थीं, तब पुलिस बैरिकेडिंग के दौरान हुई खींचतान में डिंपल यादव के हाथ में चोट आ गई थी।
पोस्टर में इस संघर्ष को दिखाते हुए लिखा गया है कि "दमन के खिलाफ जब संसद से सड़क तक डिंपल यादव जैसी जननेता उतरती हैं, तो यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतंत्र बचाने का संकल्प बनता है।" पोस्टर के जरिए सपा दफ्तर के बाहर यह संदेश दिया गया है कि सरकार की लाठियां युवाओं और महिलाओं की आवाज को दबा नहीं सकतीं।
घायल छात्रों की मदद और मानवीय चेहरा
पोस्टर में सिर्फ आक्रामक तेवर ही नहीं, बल्कि डिंपल यादव का मानवीय चेहरा भी हाइलाइट किया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज के दौरान घायल छात्र को पानी पिलाने और प्राथमिक चिकित्सा दिलवाने की तस्वीरों को शामिल कर सपा ने दर्शाया है कि पार्टी युवाओं के दर्द के साथ खड़ी है।
2027 के लिए 'MY' समीकरण का नया सियासी संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन पोस्टरों के जरिए समाजवादी पार्टी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अपना 'MY' (महिला और यूथ/युवा) समीकरण मजबूत कर रही है। अखिलेश यादव की दिल्ली में गिरफ्तारी और डिंपल यादव के सड़क पर उतरने को सपा कार्यकर्ता प्रदेशव्यापी मुद्दा बनाने में जुट गए हैं।