Harish Rana's Poignant Video: गाजियाबाद के हरीश राणा का मामला इन दिनों काफी चर्चा में है. एक समय होनहार इंजीनियरिंग छात्र रहे हरीश 2013 में एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे का शिकार हो गए थे. चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें गंभीर सिर की चोट आई, जिसके बाद वे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में चले गए. पिछले 13 सालों से वे बिस्तर पर पड़े रहे, बोल नहीं पाते, चल नहीं पाते और पूरी तरह मशीनों के सहारे जीवन व्यतीत कर रहे थे.
"Final farewell to Harish Rana. After 13 years in coma, he has reached Delhi AIIMS where life support will be withdrawn. Heartbreaking moment for his parents who cared for him tirelessly, knowing he would never wake up. Om Shanti????????
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 15, 2026
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परिवार ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. 11 मार्च 2026 को कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम (जिसमें क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन और हाइड्रेशन शामिल है) को हटाने की अनुमति दे दी. यह भारत में पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) का पहला ऐसा व्यावहारिक मामला है, जहां अदालत ने परिवार की याचिका पर यह कदम
उठाने की मंजूरी दी. कोर्ट ने इस प्रक्रिया को सम्मानजनक और मानवीय तरीके से करने के निर्देश दिए. इस फैसले के बाद हरीश को गाजियाबाद के घर से दिल्ली के एम्स ले जाया गया, जहां अब उनकी देखभाल पैलिएटिव केयर में हो रही है और लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाया जा रहा है. परिवार ब्रह्माकुमारी से जुड़ा हुआ है, इसलिए विदाई के दौरान भावुक पल भी आए.
एक छोटा-सा वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें ब्रह्माकुमारी की एक बहन (लवली दीदी) हरीश के माथे पर चंदन का तिलक लगाती दिख रही हैं. वे हरीश से कह रही हैं— "सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ... ठीक है..."
वीडियो में हरीश की आंखें हल्की-सी हिलती हैं, होंठ कांपते हैं और गले से कुछ निगलने जैसा महसूस होता है—यह दृश्य देखकर किसी का भी मन भर आता है. घर से एम्स के लिए रवाना होने से पहले परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं. पिता अशोक राणा ने कहा कि कोई माता-पिता अपने बच्चे की मौत नहीं चाहता, लेकिन बेटे की असहनीय स्थिति को देखते हुए यह कठिन फैसला लेना पड़ा.
यह घटना न सिर्फ एक परिवार का दर्द दर्शाती है, बल्कि मृत्यु के साथ सम्मान (right to die with dignity) के मुद्दे पर भी गहरी बहस छेड़ती है. हरीश के माता-पिता ने 13 साल तक उनका साथ निभाया, लेकिन आखिरकार उन्हें यह स्वीकार करना पड़ा कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है.