नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शन (CJP विरोध) के दौरान दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) वैन से अपराधियों का 'बड़ा नेटवर्क' पकड़ लिया. संसद में पेश एक सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, रीयल-टाइम फेशियल रिकग्निशन से कुल 2,873 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड मैच हुए. इनमें 2,402 क्राइम-कुंडली डेटाबेस से और 471 डोसियर रिकॉर्ड्स से पहचाने गए.
अपराधों का चौंकाने वाला ब्रेकडाउन
सबसे बड़ा वर्ग 1,884 व्यक्ति "अन्य IPC/BNS और विशेष कानून" के तहत आते हैं. कई अपराधी दोहरा अपराधी (Repeat offenders) पाए गए, जिनमें कुछ के 10 से ज्यादा मामले दर्ज हैं. दस्तावेज में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर तैनात FRS वैनों ने इनकी पहचान की. हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि इनकी गिरफ्तारी हुई या सिर्फ निगरानी की गई.
यह आंकड़ा NEET परीक्षा लीक या छात्रों के मुद्दों पर हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जिसमें 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हिंसा भी हुई थी. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन में असामाजिक तत्व घुस आए थे, जिनकी पहचान FRS से की गई.
यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी क्षमता को दिखाता है, लेकिन गोपनीयता और निगरानी के दुरुपयोग को लेकर बहस भी छेड़ सकता है. सरकार ने संसद में यह जानकारी दस्तावेज के रूप में पेश की है, जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने में AI टूल्स के इस्तेमाल का नया उदाहरण है.