तेहरान: ईरान के एक धर्मगुरु ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायलियों का खून बहाने की अपील की, जबकि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता जा रहा है. ईरानी राज्य टेलीविजन ने आयतुल्लाह अब्दोल्लाह जवाद अमोली के संदेश का प्रसारण किया, जो ईरान के वरिष्ठ शिया धर्मगुरुओं में से एक हैं. उन्होंने वाशिंगटन और उसके सहयोगियों द्वारा की गई आक्रामकता के सामने एकजुट रहने की अपील की.
अमोली ने कहा कि हम अब एक महान परीक्षा के कगार पर हैं, और हमें सावधान रहना चाहिए कि इस एकता को पूरी तरह बनाए रखें, इस गठबंधन को पूरी तरह संरक्षित रखें. उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ हिंसा की अपील करते हुए कहा कि ज़ायोनी खून का बहाया जाना चाहिए, ट्रंप का खून बहाया जाना चाहिए. धार्मिक बयानबाजी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इमाम-ए-ज़माना कहते हैं, 'जालिम अमेरिका से लड़ो, उसका खून मेरे कंधों पर है.
आयतुल्लाह शिया इस्लाम में सबसे ऊंचे दर्जों में से एक है और ईरान में दर्जनों ऐसे वरिष्ठ धर्मगुरु हैं जो धार्मिक और राजनीतिक बहस पर काफी प्रभाव रखते हैं. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संघर्ष तेज होने के बाद ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरुओं ने ज्यादातर सार्वजनिक रूप से कम प्रोफाइल रखा है. विश्लेषकों का कहना है कि उच्च-स्तरीय धार्मिक व्यक्तियों द्वारा हिंसा की स्पष्ट अपील दुर्लभ है.
ईरान युद्ध छठे दिन में प्रवेश
ईरान ने गुरुवार सुबह इजरायल पर मिसाइलों की नई लहर दागी, जिससे लाखों निवासियों को बम शेल्टर में जाना पड़ा. यह तब हुआ जब वाशिंगटन में अमेरिकी हवाई अभियान को रोकने के प्रयास असफल रहे. अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों ने उस प्रस्ताव को 53-47 से खारिज कर दिया, जिसमें आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य करने की मांग की गई थी.
इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य अभियान जारी रखने की व्यापक शक्ति मिल गई. यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे. उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई तेहरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए की गई थीं. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए. अब तक संघर्ष में 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
संघर्ष अब ईरान और इजरायल से आगे फैल चुका है. बुधवार को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट पर एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसमें कम से कम 87 लोग मारे गए. वहीं, नाटो की वायु रक्षा ने तुर्की की ओर जा रही एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर नष्ट कर दिया.
ईरान ने इसके जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमलों से अमेरिकी और इजरायली ठिकानों तथा मध्य पूर्व में अन्य अमेरिकी-संबंधित सुविधाओं को निशाना बनाया है. कई खाड़ी देशों, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, इजरायल, ईरान और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, हालांकि कुछ सीमित उड़ानें चालू हैं ताकि फंसे हुए नागरिकों (भारतीय नागरिकों सहित) को घर वापस लाया जा सके.