वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के उफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. मंगलवार को भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना रहा, जिससे शहर के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार सुबह गंगा नदी का जलस्तर 72.22 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से काफी ऊपर है. बाढ़ का पानी रामनगर से लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर मार्ग तक फैल गया है, जिससे यातायात और दैनिक गतिविधियां ठप हो गई हैं.
जिला प्रशासन के अनुसार, बाढ़ ने जिले की 1898 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया है, जिससे 7037 किसान प्रभावित हुए हैं. खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं. स्थानीय निवासियों ने बताया कि गंगा के घाटों पर पानी भरने से धार्मिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं. दशाश्वमेध और अस्सी घाट जैसे प्रमुख घाटों पर जल स्तर बढ़ने से पूजा-पाठ और स्नान की गतिविधियां रुक गई हैं.
कई परिवारों को अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों में शरण लेनी पड़ी है. जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए टीमें तैनात की गई हैं. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और स्थानीय पुलिस बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य में जुटी हुई है. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है.
प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है. बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, और स्थानीय अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट पर रखा गया है. यह बाढ़ वाराणसी के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, और प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने और नुकसान को कम करने की कठिन जिम्मेदारी है.