पूर्व जवान और उनकी पत्नी ने आर्मी इंश्योरेंस फंड के लिए रची भयंकर साजिश, पुलिस का सिर चकराया!

Amanat Ansari 10 Mar 2026 04:09: PM 2 Mins
पूर्व जवान और उनकी पत्नी ने आर्मी इंश्योरेंस फंड के लिए रची भयंकर साजिश, पुलिस का सिर चकराया!

नई दिल्ली: दिल्ली के वसंत विहार पुलिस स्टेशन में एक पूर्व भारतीय सेना जवान पर अपने ही मौत को कागजों पर रचने और पत्नी की मदद से इंश्योरेंस राशि की ठगी का आरोप लगा है. एफआईआर के अनुसार, बिहार रेजिमेंट के पूर्व सैनिक आरोपी अखिलेश कुमार और उनकी पत्नी ज्ञांति देवी  ने दस्तावेजों को जाली बनाकर यह दिखाया कि कुमार की मौत हो चुकी है और इसी आधार पर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड से पैसे हासिल किए.

पुलिस के मुताबिक, अखिलेश कुमार ने 1998 में सेना जॉइन की थी और 2010 में रिटायर हुए. उन्होंने 12 साल 8 महीने की सेवा की, जिसके कारण उन्हें पेंशन का हक नहीं मिला. रिटायरमेंट के बाद वे बिहार के अपने गांव लौट आए. शिकायत के अनुसार, उन्होंने और उनकी पत्नी ने इंश्योरेंस बेनिफिट हासिल करने के लिए एक योजना बनाई.

2011 में ज्ञांति देवी ने सेना को सूचित किया कि उनके पति की 17 सितंबर 2011 को बिजली का झटका लगने से मौत हो गई. दावे को साबित करने के लिए उन्होंने जाली दस्तावेज जमा किए, जिनमें गांव पंचायत द्वारा जारी फर्जी मौत प्रमाण पत्र, एफिडेविट और अन्य कागजात शामिल थे.

इन दस्तावेजों के आधार पर आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड ने जून 2013 में दावा मंजूर किया और 3 लाख रुपए पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए. अधिकारियों ने बताया कि भुगतान में देरी के कारण उन्हें अतिरिक्त 21,750 रुपए ब्याज के रूप में भी मिले.

ग्रामीण की सूचना से फर्जीवाड़ा हुआ बेनकाब

यह कथित ठगी तब सामने आई जब बिहार के जहानाबाद जिले में पुलिस जांच के दौरान पता चला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में मृत घोषित अखिलेश कुमार जिंदा हैं. जांचकर्ताओं के अनुसार, एक ग्रामीण को पता चला कि आर्मी रिकॉर्ड में कुमार को मृत दिखाया गया है, तो उन्होंने अधिकारियों को सूचित किया. इसके बाद सेना ने पुलिस से जांच कराई.

जांच में पुष्टि हुई कि कुमार जीवित हैं, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई. आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड के अधिकारियों ने अदालत का रुख किया, जिसके निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने वसंत विहार थाने में पूर्व सैनिक और उसकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया.

केस भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (ठगी), 468 (ठगी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल) के तहत दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि जांच जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था, जिसमें स्थानीय अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं.

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