मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने UCC लाने के दिए संकेत

Amanat Ansari 10 Mar 2026 01:58: PM 1 Mins
मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने UCC लाने के दिए संकेत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code या UCC) लागू करने की मजबूत वकालत की. यह टिप्पणी मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) के तहत महिलाओं के अधिकारों, खासकर उत्तराधिकार (Inheritance) में कथित भेदभाव को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर आई.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि पूरे देश में UCC लागू करना ही सभी महिलाओं को समान अधिकार देने का सबसे प्रभावी और एकमात्र तरीका है. जस्टिस बागची ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब UCC लागू करने का समय आ गया है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि पर्सनल लॉ को सीधे अमान्य घोषित करने से कानूनी शून्यता (legal vacuum) पैदा हो सकती है, इसलिए इसे विधायिका के विवेक पर छोड़ना बेहतर होगा, ताकि संसद UCC पर कानून बना सके.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि मुस्लिम पुरुष एकतरफा तलाक (Triple talaq जैसी प्रक्रिया) दे सकते हैं, जबकि महिलाओं के अधिकार सीमित हैं. उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ से जुड़ी जटिलताओं, जैसे बहुविवाह (Polygamy) या असमान उत्तराधिकार, से निपटने के लिए UCC ही जवाब है. कोर्ट ने विधायिका से अपील की कि वह इन मुद्दों पर काम करे, क्योंकि मौलिक कर्तव्यों को लागू करने के लिए विधायी शक्ति जरूरी है.

याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरिया) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 को चुनौती दी गई थी, जिसमें दावा किया गया कि यह महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम उत्तराधिकार अधिकार देता है. याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह भेदभाव असंवैधानिक है और महिलाओं को बराबर हिस्सा मिलना चाहिए.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वे याचिका में संशोधन क्यों नहीं करते और वैकल्पिक प्रावधानों (जैसे UCC की दिशा में) पर विचार क्यों नहीं करते? मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ 1937 के एक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय महिलाओं के एक बड़े हिस्से को उनके अधिकारों से वंचित रखने का है. प्रशांत भूषण ने जवाब दिया कि वे याचिका में संशोधन करेंगे.

इसके बाद कोर्ट ने मामले को स्थगित कर दिया और याचिकाकर्ता को संशोधित याचिका दाखिल करने की अनुमति दी. संक्षेप में, सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई में UCC को न सिर्फ महिलाओं के समान अधिकारों की गारंटी बताया, बल्कि पर्सनल लॉ की जटिलताओं से बचने का व्यावहारिक रास्ता भी माना. यह टिप्पणी देश में UCC पर बहस को और तेज करने वाली है.

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