नई दिल्ली: भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल और ईरान दोनों को एक फोन कॉल मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को रोकने में मदद कर सकता है. मिर्ज़ा ने भारत की कूटनीतिक स्थिति और पीएम मोदी के दोनों देशों के साथ संबंधों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इन दोनों कारकों के संयोजन से तनाव कम किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है. भारत की प्रोफाइल... यह महज एक तथ्य है कि श्री मोदी का इजरायल और ईरान दोनों को रोकने के लिए एक टेलीफोन कॉल, यह रुक जाएगा. सिर्फ एक फोन कॉल. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी हाल ही में इजरायल गए थे और ईरान के साथ भी उनके बहुत अच्छे संबंध हैं. श्री मोदी 10 दिन पहले इजरायल में थे. श्री मोदी का ईरान के साथ बहुत-बहुत अच्छा रिश्ता है. वह ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. बहुत सरल... मोदी का एक फोन कॉल समस्या हल कर देगा.
हुसैन हसन मिर्ज़ा ने यह भी कहा कि वे भारत से कूटनीतिक हस्तक्षेप की उम्मीद करते हैं, क्योंकि यूएई में बड़ी भारतीय समुदाय है जो दशकों से देश के विकास में योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि मैं भारतीय नेतृत्व और सरकार पर बहुत अधिक भरोसा करता हूं कि वे हस्तक्षेप करें... हमारे देश में अपनी कम्युनिटी को बचाने और संरक्षित करने के लिए — वह कम्युनिटी जिसने इंफ्रास्ट्रक्चर में मदद की, व्यापार में मदद की, बिजनेस में मदद की... अब से नहीं, 70 या 80 साल पहले से.
यूएई में 35 लाख से अधिक भारतीय
इंटरव्यू के दौरान मिर्ज़ा ने कहा कि यूएई ने अपनी धरती से ईरान के खिलाफ कोई गतिविधि की अनुमति नहीं दी है. उन्होंने कहा कि हमने अपनी तरफ से ईरान के खिलाफ कोई गतिविधि की अनुमति नहीं दी. यह पक्का है. उन्होंने जोड़ा कि कुवैत और कतर जैसे अन्य खाड़ी देशों ने भी अपनी धरती से ईरान के खिलाफ हमलों की अनुमति नहीं दी है.
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का संघर्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने के जवाब में खाड़ी के कई देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं. संयुक्त अरब अमीरात पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं. यूएई ने बार-बार जोर दिया है कि वह अपनी धरती की रक्षा पर केंद्रित है और साथ ही संघर्ष को क्षेत्र में और फैलने से रोकने की कोशिश कर रहा है.