नई दिल्ली: कुछ हफ्ते पहले पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब ने संसद में तूफान खड़ा कर दिया था. अब पूर्व सेना प्रमुख ने उस विवाद पर पहली बार खुलकर बात की और डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह द्वारा उनको दिए गए कथित "जो उचित समझो, वो करो" वाले बयान का मतलब समझाया. India Today से बात करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि यह बयान सरकार का सेना पर पूर्ण विश्वास दिखाता है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. जनरल नरवणे ने जोर देकर कहा कि सेना को मैदान में स्थिति के अनुसार जवाब देने के लिए पूरी छूट दी गई थी.
उन्होंने कहा, ''जो उचित समझो वो करो का मतलब यह है कि सरकार को सेना पर पूरा भरोसा था. इस विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.'' उन्होंने आगे समझाया कि यह मूल रूप से यह दिखाता है कि सरकार को सेना, उसकी कमान और सर्विस चीफ्स पर कितना बड़ा भरोसा था. उन्हें पता था कि जो भी फैसला लिया जाएगा, वह सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा. जनरल नरवणे ने सेना को राजनीतिक बनाने के खिलाफ भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल पूरी तरह से अराजनीतिक हैं, हमारे पड़ोस के देशों के विपरीत.
विवाद क्या था?
विवाद फरवरी में बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में जनरल नरवणे की अभी अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ से उद्धरण पढ़ने की कोशिश की. स्पीकर ने उन्हें रोका क्योंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई थी. लेकिन राहुल गांधी नहीं रुके. उन्होंने सत्र के बाकी दिनों में किताब की एक कॉपी संसद परिसर में भी लाकर रखी. विवाद की जड़ उस ''जो उचित समझो, वो करो'' वाले मैसेज में है, जो कथित तौर पर डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से जनरल नरवणे को चीन के साथ सीमा विवाद के दौरान दिया था.
राहुल गांधी ने किताब के हवाले से दावा किया था कि पूर्व सेना प्रमुख ने राजनाथ सिंह और अन्य को बताया कि चीनी टैंक आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय तक कोई सीधा जवाब नहीं मिला. राहुल गांधी ने कहा था, ''पीएम का मैसेज उन तक यह पहुंचा जो उचित समझो, वो करो. इसका मतलब है कि नरेंद्र मोदी ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई… सेना प्रमुख ने किताब में साफ लिखा है कि उन्हें अकेला महसूस हुआ और पूरा सिस्टम उन्हें छोड़ गया.
यह घटना 31 अगस्त 2020 की है, जब चीनी सेना रेचिन ला की तरफ बढ़ रही थी. किताब को मूल रूप से 2024 में पेंगुइन द्वारा प्रकाशित किया जाना था, लेकिन उसकी रिलीज रोक दी गई. फिलहाल यह किताब रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है. जनरल नरवणे ने India Today को बताया कि प्रकाशक सरकार से किताब की प्रकाशन की मंजूरी के लिए संपर्क में है.
'वर्गीकृत दस्तावेजों पर आधारित नहीं'
जनरल नरवणे ने साफ किया कि उनकी किताब उनके व्यक्तिगत अनुभव और नजरिए पर आधारित है, न कि किसी वर्गीकृत (क्लासिफाइड) दस्तावेजों पर.
चीन के साथ सीमा गतिरोध पर उन्होंने कहा कि भारत ने स्थिति पर दबदबा बनाए रखा. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि चीन ने कुछ इलाकों में अपने स्वयं के किलेबंदी को तोड़ा और सैनिक पीछे हटाए. उन्होंने विपक्ष के ''भारत ने जमीन खो दी'' वाले दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, ''LAC पर भारत ने स्थिति पर नियंत्रण रखा. कोई भी क्षेत्र चीन को नहीं सौंपा गया.'' पूर्व सेना प्रमुख ने यह भी जोर दिया कि सीमा तनाव के दौरान सरकार और सशस्त्र बलों के बीच बहुत अच्छा समन्वय था और सभी फैसले संयुक्त रूप से लिए गए थे.