चंडीगढ़: हरियाणा की सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों के साथ होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. इसके तहत सरकार ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए खाप पंचायतों का सहयोग लेने का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सामाजिक समरसता ही राज्य के सर्वांगीण विकास का आधार है.
राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक
मुख्यमंत्री सैनी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर हाल ही में राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने पर जोर दिया गया. सीएम ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति के किसी भी व्यक्ति के साथ उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को उत्पीड़न के मामलों में तुरंत और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए.
खाप पंचायतों की भूमिका
बता दें कि हरियाणा में खाप पंचायतें सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. सरकार ने इन पंचायतों को सामाजिक समरसता के लिए जागरूकता फैलाने और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने में शामिल करने का फैसला किया है. खाप पंचायतों से अपील की गई है कि वे अपने समुदायों में भेदभाव विरोधी संदेश प्रसारित करें और सामाजिक एकता को बढ़ावा दें. सीएम सैनी ने कहा कि खाप पंचायतों का सहयोग सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित होगा.
निगरानी कमेटियों की सक्रियता
मुख्यमंत्री ने जिला और उपमंडल स्तर पर सतर्कता एवं निगरानी कमेटियों की बैठकों को नियमित करने के निर्देश दिए हैं. इन कमेटियों को उत्पीड़न के मामलों की निगरानी करने और पीड़ितों को समय पर सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सीएम ने जोर देकर कहा कि इन कमेटियों को सक्रिय और जवाबदेह बनाना जरूरी है ताकि कानून का प्रभावी ढंग से पालन हो सके.
सामाजिक समरसता के लिए प्रतिबद्धता
सीएम सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार सभी वर्गों के कल्याण और समानता के लिए प्रतिबद्ध है. अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी. उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे भेदभाव को खत्म करने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने में सहयोग करें.
कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के तहत उत्पीड़न के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है. सरकार ने इस कानून के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने का संकल्प लिया है. पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे उत्पीड़न की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करें और पीड़ितों को न्याय दिलाने में कोई कोताही न बरतें.