बस्ती : उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी बजरंग प्रसाद के जीवन की सबसे दर्दनाक घटना से जुड़े मामले में बस्ती की जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने उनके पिता की हत्या के मामले में सभी 9 दोषियों को दोषी करार देते हुए 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई है. यह मामला वर्ष 2020 का है, जब बस्ती जिले में बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या कर दी गई थी.
उस वक्त बजरंग प्रसाद दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन उनकी मां ने बेटे की पढ़ाई और भविष्य को देखते हुए उन्हें अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं होने दिया. मां चाहती थीं कि इस सदमे से उनकी तैयारी प्रभावित न हो और बेटा अपने लक्ष्य से न भटके.
बजरंग प्रसाद ने भी परिवार के इस फैसले को अपनी ताकत बनाया और सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी. आखिरकार मेहनत रंग लाई. वर्ष 2023 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा में 454वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया.
आज वही बजरंग प्रसाद पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. फिलहाल वह मेरठ में अंडर-ट्रेनिंग IPS अधिकारी के रूप में तैनात हैं और अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के लिए हैदराबाद स्थित पुलिस अकादमी गए हुए हैं.
पिता की हत्या का दर्द, अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने की कसक और वर्षों की मेहनत इन सबके बीच बजरंग प्रसाद की सफलता की कहानी संघर्ष, संकल्प और मां के त्याग की मिसाल बनकर सामने आई है. अदालत का फैसला आने के बाद परिवार को वर्षों से चले आ रहे इस मामले में न्याय मिला है.