नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने शनिवार को एक आयोजन में मुसलमानों की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि दुनिया यह मान रही है कि मुस्लिम समाज अपंग और खत्म हो चुका है, लेकिन वे ऐसा नहीं मानते. मौलाना मदनी ने उदाहरण देते हुए कहा, ''लंदन में सद्दीक खान और अमेरिका में किसी ममदानी जैसे व्यक्ति मेयर बन सकते हैं, लेकिन हिंदुस्तान में कोई मुस्लिम विश्वविद्यालय का कुलपति तक नहीं बन पाता. अगर कोई बन भी जाए तो आजम खान की तरह जेल भेज दिया जाता है.''
उन्होंने अल फलाह यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से सरकारों का रवैया यही रहा है कि मुसलमानों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाए. इस यूनिवर्सिटी के साथ जो हो रहा है, वह इसी मानसिकता का नतीजा है. बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहसिन रजा ने मौलाना मदनी के बयान को खारिज करते हुए कहा कि मदनी परिवार दशकों से मुसलमानों को सिर्फ गुमराह करने और अपने निजी हित साधने का काम करता आया है.
उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारों से मिली ग्रांट का इस्तेमाल उन्होंने अपने फायदे के लिए किया, मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए नहीं. उन्होंने चुनौती दी कि मदनी परिवार बताए कि उन्होंने कितनी यूनिवर्सिटी या संस्थान बनाए और कितने मुसलमानों का भला किया. दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उदित राज ने मौलाना मदनी के बयान से सहमति जताई.
उन्होंने कहा कि आजम खान का डुप्लिकेट पैन कार्ड रखना गलत था, लेकिन देश में बड़े स्तर पर डुप्लिकेट आधार कार्ड, वोटर आईडी और यहां तक कि प्रधानमंत्री की डिग्री पर भी सवाल उठते रहे हैं, फिर कार्रवाई सिर्फ मुसलमानों पर ही क्यों होती है.
अल फलाह यूनिवर्सिटी को बंद करना या पूरे संस्थान को निशाना बनाना गलत है. अगर कोई व्यक्ति आतंकवाद जैसा अपराध करता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए, लेकिन पूरी संस्था को सजा देना अन्याय है. उदित राज ने यह भी कहा कि देश में बुलडोजर की कार्रवाई और अन्य दबाव सिर्फ मुस्लिम समुदाय पर ही दिख देखने को मिलते हैं, जो चिंता की बात है.