मुज्जफरनगर : तीन महीने के अंदर अलग-अलग मामलों में 13 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि दिवाकर चर्चाओं में है. हत्या के बहुचर्चित राजबीर सिंह हत्याकांड में 13 दोषियों को फांसी की सजा सुनाने के बाद जज रवि दिवाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं. अदालत ने सभी आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश समेत गंभीर आरोपों में दोषी ठहराते हुए मामले को दुर्लभतम में दुर्लभ श्रेणी का माना. दोषियों में एसीपी अनुज चौधरी का ममेरा भाई प्रमोद भी शामिल है, जिसे अन्य आरोपियों के साथ मृत्युदंड की सजा सुनाई गई. भारतीय कानून के तहत इस सजा पर अंतिम मुहर संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही लगेगी.
जज रवि दिवाकर इससे पहले भी कई चर्चित मामलों में अपने आदेशों को लेकर चर्चा में रहे हैं. वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद में उन्होंने वर्ष 2022 में अदालत की निगरानी में परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया था. इसी आदेश के बाद सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसकी रिपोर्ट बाद में अदालत में पेश की गई. यह मामला देशभर में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा.
इसके अलावा उन्होंने कई गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फैसले सुनाए हैं. कानूनी जानकारों का कहना है कि उनके कई आदेश हाई-प्रोफाइल मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं.
राजबीर सिंह हत्याकांड के फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने राहत जताई है. वहीं, सभी दोषियों को कानून के तहत उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार प्राप्त रहेगा. जज रवि दिवाकर का यह ताजा फैसला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. तीन महीने में 13 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाकर सुर्खियों में आ गए हैं.