नई दिल्ली: लंबे समय के इंतजार के बाद, कैलाश मानसरोवर यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है. यह पवित्र यात्रा जून से अगस्त 2025 के बीच होगी. भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इसकी घोषणा की है और यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं. इच्छुक यात्री आधिकारिक वेबसाइट http://kmy.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. यह यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथु ला दर्रे के रास्ते होगी.
कैलाश मानसरोवर यात्रा क्या है?
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थयात्रा है. यह तिब्बत (चीन) में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन के लिए की जाती है. कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है, जबकि मानसरोवर झील को पवित्र जल का स्रोत माना जाता है. हर साल हजारों लोग इस यात्रा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन सीमित संख्या में ही लोग चुने जाते हैं.
पांच साल बाद यात्रा क्यों शुरू हो रही है?
कैलाश मानसरोवर यात्रा आखिरी बार 2019 में हुई थी. 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण यह रुकी, और बाद में भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव, खासकर गलवान घाटी में 2020 की झड़प के कारण, यह यात्रा पूरी तरह बंद हो गई. लेकिन अब दोनों देशों के बीच रिश्ते बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं. अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान (रूस) में मुलाकात हुई. इसके बाद दोनों देशों ने आपसी बातचीत तेज की.
भारत ने बार-बार चीन से इस यात्रा को फिर से शुरू करने की मांग की. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नवंबर 2024 में जी-20 शिखर सम्मेलन में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से इस मुद्दे पर बात की. दिसंबर 2024 में विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक और जनवरी 2025 में विदेश सचिव की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई. आखिरकार, दोनों देशों ने 2025 की गर्मियों में यात्रा शुरू करने पर सहमति जताई.
दो रास्तों से होगी यात्रा
कुल मिलाकर, 750 यात्री इस बार यात्रा पर जा सकेंगे. यात्रा का चयन पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित, निष्पक्ष और लिंग-संतुलित प्रक्रिया से होगा. इसका मतलब है कि पुरुष और महिला यात्रियों का चयन बराबर और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा.
आवेदन कैसे करें?
यात्रा के लिए आवेदन वेबसाइट http://kmy.gov.in पर जमा करना होगा. विदेश मंत्रालय ने सलाह दी है कि किसी भी सवाल या सुझाव के लिए वेबसाइट पर उपलब्ध फीडबैक विकल्प का उपयोग करें. पत्र या फैक्स भेजने की जरूरत नहीं है. आवेदन प्रक्रिया 2015 से पूरी तरह डिजिटल है, जिससे यह आसान और पारदर्शी हो गई है.
भारत-चीन संबंध और यात्रा का महत्व
2025 की कैलाश मानसरोवर यात्रा खास है क्योंकि यह भारत और चीन के बीच 75 साल के कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक होगी. दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. उदाहरण के लिए, पूर्वी लद्दाख में डेपसांग और डेमचोक जैसे विवादित क्षेत्रों से दोनों सेनाओं ने पीछे हटने का फैसला किया है. सामान्य गश्त भी फिर से शुरू हो गई है.
26 मार्च 2025 को बीजिंग में दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक हुई. इसमें लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया, जैसे दिल्ली और बीजिंग के बीच सीधी उड़ानें शुरू करना और मीडिया व थिंक टैंकों के बीच संवाद को बढ़ावा देना.
लिपुलेख दर्रे का विवाद
लिपुलेख दर्रा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत, चीन और नेपाल के त्रि-जंक्शन पर स्थित है. भारत ने यात्रियों की सुविधा के लिए पिथौरागढ़ से लिपुलेख तक 80 किलोमीटर की सड़क बनाई थी, जिस पर नेपाल और चीन ने आपत्ति जताई थी. लेकिन अब यात्रा शुरू होने से इस रास्ते का महत्व और बढ़ गया है.
यात्रा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. यह भारत और चीन के बीच लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने का एक जरिया है. यह यात्रा कठिन है, लेकिन हर साल हजारों लोग इसमें हिस्सा लेने के लिए उत्साहित रहते हैं. पांच साल के लंबे इंतजार के बाद, कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुरू होना एक बड़ी उपलब्धि है. यह न केवल धार्मिक यात्रियों के लिए खुशी की बात है, बल्कि भारत-चीन के बीच बेहतर रिश्तों का भी संकेत है. अगर आप इस यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द http://kmy.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करें और इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनें.