ग्लोबल भारत नेशनल डेस्क: कपिल सिब्बल एक सीनियर वकील हैं, उन्हें अपने हिसाब से केस लड़ने का संवैधानिक हक़ भी है, लेकिन जब उनका हर केस एक धर्म के पक्ष में और एक धर्म के विरुद्ध जाता दिखता है, तब सवाल उठते हैं, क्या सुप्रीम कोर्ट अब राजनीति का मैदान बन रहा है? और यही मुद्दा है, जिस पर अब जनता की अदालत फैसला करेगी. अब आप इस रिपोर्ट को पढ़िए, जिसके बाद आप ये तय कर लेंगे समाजवादी पार्टी ने कपिल सिब्बल को राज्यसभा क्यों भेजा था? कांग्रेस ने कपिल सिब्ब्ल को राज्यसभा नहीं भेजा तो समाजवादी पार्टी ने भेजा?
सुप्रीम कोर्ट में जियाऊर्रहमान बर्क की याचिका थी. अखिलेश यादव का साथ देने और मुसलमानों के हितैषी दिखने के लिए कपिल सिब्बल न सिर्फ कोर्ट में जज साहब की फटकार सुनते हैं बल्कि वक्फ़ बोर्ड कानून को न लागू करने के लिए कई तर्क भी देते हैं! ABP न्यूज़ की रिपोर्ट दावा करती है कि कोर्ट में सिब्बल को फटकार लगी है...राम मंदिर मामले में वक्फ बोर्ड की पैरवी, ट्रिपल तलाक पर कट्टर समर्थन, और सबरीमाला में परंपरा के खिलाफ रुख...सुप्रीम कोर्ट के कई बड़े मामलों में कपिल सिब्बल विरोधियों के पक्ष में नज़र आए, और यहीं से शुरू हुआ ये सवाल, क्या ये सिर्फ एक वकील की प्रोफेशनल जिम्मेदारी है या एक सोची-समझी राजनीति? सबसे पहले आपको दिखाते हैं. कपिल सिब्ब्ल कैसे सनातन का विरोध कर देश के मुसलमानों के हीरो बन गए? राम मंदिर केस में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील बने तो ट्रिपल तलाक में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील के तौर पर कोर्ट में बहस की! वक्फ़ बोर्ड से पहले रामसेतू मसले पर कपिल सिब्बल ने क्या कहा था. पहले आप वो देखिए....उस वक्त केंद्र में UPA सरकार थी. और सिब्बल सॉलिसिटर जरनल के तौर पर कोर्ट में पेश हुए, जिसमें उन्होंने कहा...
मीलॉर्ड, “रामायण एक धार्मिक ग्रंथ है, इतिहास नहीं, इसलिए ये कहना कि रामसेतु को भगवान राम ने बनाया था, वैज्ञानिक या ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सही नहीं है. धार्मिक आस्था विकास के रास्ते में नहीं आ सकती, रामायण कोई ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि काल्पनिक है!”
कपिल सिब्बल कभी इशरत जहां एनकाउंटर में पैरवी करते दिखे तो कभी CAA-NRC कानून के ख़िलाफ़ कोर्ट में मुसलमानों के साथ खड़े रहे? राम मंदिर के मसले पर भी वो मुसलमानों के साथ थे तो वक्फ़ बोर्ड पर भी वो मुसलमानों के साथ हैं! आज़म ख़ान को ज़मानत चाहिए तो कपिल सिब्बल मैदान में आते हैं! चारा घोटाले में लालू को ज़मानत भी कपिल सिब्बल ही दिलाते हैं! हालांकि ये उनका पेशा है, उन्हें वकालत करने का हक़ मिला है, लेकिन असल बात ये भी है कि वो कांग्रेस के नेता रहे और अब समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं! कपिल सिब्बल को कोर्ट रूम में जज साहब ने इसलिए फटकारा क्योंकि जब मुख्य न्यायाधीश जस्टिस खन्ना अपना फैसला लिखवा रहे थे तब सिब्बल उन्हें टोकते हैं!
कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी की पैरवी से पूरा देश नाराज़ हैं, हालांकि वो वकील है, तो फिर उन्हें सियासी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए...क्योंकि इससे तो साफ संकेत यही मिल रहा है कि समाजवादी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में अपना वकील खड़ा किया है. वक्फ़ बोर्ड को रोको, कैसे भी करके रोको, क्या ये सही है?