नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है कि दक्षिणी राज्य का नाम 'केरलम' किया जाए. यह फैसला राज्य में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आया है. यह प्रस्ताव आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय 'सेवा तीर्थ' (नई पीएमओ बिल्डिंग, दिल्ली) में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंजूर हुआ.
यह इस स्थान पर कैबिनेट की पहली बैठक थी, पिछली बैठक 13 फरवरी को साउथ ब्लॉक में हुई थी. केरल विधानसभा ने 25 जून 2024 को दूसरी बार सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र सरकार से राज्य का आधिकारिक नाम 'केरलम' करने की मांग की गई थी. इससे पहले अगस्त 2023 में भी सर्वसम्मति से ऐसा ही प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन केंद्र ने उसकी समीक्षा के बाद कुछ तकनीकी बदलावों की सिफारिश की थी ताकि स्पष्टता और अनुपालन बेहतर हो.
केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने यह प्रस्ताव पेश किया था और उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की थी कि राज्य का नाम संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में 'केरलम' किया जाए. विजयन ने कहा था कि मलयालम में राज्य को 'केरलम' ही कहा जाता है और यह नाम राज्य के इतिहास में गहराई से जुड़ा हुआ है.
उन्होंने संविधान की पहली अनुसूची में 'केरल' शब्द का जिक्र करते हुए मांग की व्याख्या की थी. साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से ही एकजुट मलयालम-भाषी राज्य बनाने की मांग का भी उल्लेख किया. केरल विधानसभा ने केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम 'केरलम' किया जाए और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में इसे लागू किया जाए.