लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों से ज्यादा 'पोस्टर और अवतार' की गूंज सुनाई दे रही है। संसद से लेकर सड़क तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रखर हिन्दुत्व वाली ललकार के बीच विपक्षी खेमे में खुद को सनातनी प्रतीकों से जोड़ने की एक नई होड़ मच गई है। हाल ही में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में पेश करने के बाद, अब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के जन्मदिन पर उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के रूप में दिखाने वाला एक पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, नेताओं के इन 'दिव्य रूपों' पर आम जनता ने सोशल मीडिया पर जमकर मजे लिए हैं और उनकी पोल खोल कर रख दी है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 53वें जन्मदिन के मौके पर वाराणसी (काशी) में सपा कार्यकर्ताओं ने एक खास पोस्टर जारी किया। इस पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाया गया है, जिनके एक हाथ में सुदर्शन चक्र की जगह भारत का संविधान नजर आ रहा है। सपा नेताओं का तर्क है कि जिस तरह श्रीकृष्ण ने अधर्म के खिलाफ धर्म की स्थापना की थी, उसी तरह अखिलेश यादव भी देश में संविधान और न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस मौके पर बाकायदा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-पाठ और आरती भी की गई।
राहुल के 'परशुराम' अवतार के बाद अखिलेश की बारी
यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े विपक्षी नेता को भगवान के रूप में प्रोजेक्ट किया गया हो। कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के जन्मदिन पर उनके उत्साही समर्थकों ने उन्हें भगवान परशुराम के रूप में दिखाते हुए पोस्टर लगाए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी और सीएम योगी आदित्यनाथ के मजबूत हिन्दुत्व कार्ड का मुकाबला करने के लिए विपक्ष अब 'सॉफ्ट हिन्दुत्व' और धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रहा है।
बीजेपी का तीखा हमला, जनता ने भी ली चुटकी
इस पोस्टर के सामने आते ही सूबे की सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे सनातन धर्म का खुला अपमान करार दिया है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि जो दल हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करते आए हैं, वे अब केवल राजनीतिक फायदे के लिए खुद को भगवान घोषित करने पर उतारू हैं। बीजेपी ने सपा से इस कृत्य के लिए तुरंत सार्वजनिक माफी की मांग की है।
वहीं, दूसरी तरफ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आम जनता (पब्लिक) ने भी इस 'पोस्टर वॉर' पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि चुनाव आते ही नेताओं को भगवान याद आने लगते हैं। लोगों ने कमेंट्स के जरिए नेताओं को याद दिलाया कि जनता अब इन प्रतीकात्मक हथकंडों को अच्छी तरह समझती है और सिर्फ पोस्टर बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती।