चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर रोक संबंधी मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश राज्य के मौजूदा कानूनों के दायरे से आगे जाता है और इससे कानूनी व प्रशासनिक भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है.
दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने मई 2026 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि तमिलनाडु में बकरीद ही नहीं, बल्कि किसी भी दिन गाय और बछड़ों का वध न होने दिया जाए. अदालत ने मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) को इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे.
तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 के तहत निर्धारित शर्तों में कुछ मामलों में गौवंश के वध की अनुमति है. ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश लागू कानून से परे प्रतीत होता है और इसके दायरे को लेकर स्पष्टता आवश्यक है. इसी वजह से सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है.
मामले को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है. एक पक्ष हाईकोर्ट के आदेश को संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों के अनुरूप बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और राज्य के प्रचलित कानूनों के विपरीत मान रहा है. अब इस संवेदनशील मामले पर अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.