नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता बहाल करने की अपील को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, राज्यसभा सांसद मनोज झा समेत कई प्रमुख हस्तियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से संवाद शुरू करने की अपील किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा विरोध जताया है.
जानकारी के मुताबिक, 100 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी बुद्धिजीवियों एवं सार्वजनिक हस्तियों ने एक संयुक्त पत्र जारी कर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से दक्षिण एशिया में शांति, संवाद और सहयोग बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है. पत्र में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य करने, वीजा सेवाएं बहाल करने, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की अपील की गई है.
इस अपील के सामने आते ही भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जारी रहने के बावजूद इस तरह की मांग करना देश के शहीदों और सुरक्षा बलों का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेता बार-बार पाकिस्तान के प्रति नरम रुख अपनाते रहे हैं.
वहीं, इस पहल का समर्थन करने वाले नेताओं का कहना है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच संवाद ही क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का रास्ता खोल सकता है. उनका तर्क है कि बातचीत के जरिए ही विश्वास बहाली और तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है.
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है. विपक्ष और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.