नई दिल्ली: हिमांशी नरवाल, जिनके पति लेफ्टिनेंट विनय नरवाल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे, ने भारत की ऑपरेशन सिंदूर कार्रवाई का स्वागत किया है. इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. हिमांशी ने इसे 26 लोगों की जान लेने वालों के लिए "करारा जवाब" बताया. इस कार्रवाई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कठोर नीति को दर्शाया और शहीदों के परिवारों को न्याय का अहसास कराया.
आतंकियों को करारा जवाब
बुधवार तड़के भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और PoK में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. इनमें जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर और लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके (पंजाब, पाकिस्तान) जैसे प्रमुख ठिकाने शामिल थे. यह कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे. हिमांशी ने इस कार्रवाई को "उचित जवाब" बताते हुए कहा कि इससे आतंकियों और उनके आकाओं को कड़ा संदेश गया है.
हिमांशी की भावुक प्रतिक्रिया
हिमांशी ने ऑपरेशन के बाद अपनी भावनाएं साझा कीं. उन्होंने कहा, "हमारी सेना और मोदी सरकार ने आतंकियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया है. हमने जो दर्द सहा, 26 परिवारों ने जो खोया, उसे अब सीमा पार वालों को महसूस कराया गया है." हिमांशी ने हमले के दिन को याद करते हुए बताया कि उन्होंने आतंकियों से रहम की भीख मांगी थी. "मैंने उनसे कहा कि मेरी शादी को सिर्फ छह दिन हुए हैं. मैंने उनसे दया की गुहार लगाई. लेकिन आतंकियों ने जवाब दिया, 'मोदी से मांगो.' आज मोदी जी और हमारी सेना ने उन्हें जवाब दे दिया." हिमांशी ने कहा कि पहलगाम हमले का बदला ले लिया गया है, जिससे संतुष्टि है, लेकिन उनके पति विनय और 26 अन्य लोगों की कमी हमेशा खलेगी.
हिमांशी का दर्द और गलतफहमी
पति की शहादत के बाद हिमांशी ने हिंदू-मुस्लिम एकता और कश्मीरियों के समर्थन की बात कही थी, जिसके लिए उन्हें आलोचना और अपमान का सामना करना पड़ा. उन्होंने इस पर दुख जताते हुए कहा, "मेरे शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया और मेरे खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ. मैं एक बहादुर सैनिक की पत्नी हूं. हमले के बाद मैंने पहलगाम में दो घंटे अकेले सामना किया. मेरे साथ 26 अन्य बहनें और महिलाएं थीं. हम उम्मीद कर रहे थे कि सरकार और सेना हमारे दर्द को समझेगी." हिमांशी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने उनके दर्द को स्वीकार किया और हर भारतीय का गर्व बढ़ाया.