तिरुवनंतपुरम: केरल भाजपा को झटका लगा है. पूर्व डीजीपी और भाजपा काउंसलर आर. श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के सास्थमंगलम वार्ड से काउंसलर पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने शनिवार को मेयर वी.वी. राजेश को इस्तीफा पत्र सौंप दिया और सोमवार को जिला कलेक्टर को इसकी कॉपी देने की बात कही है. आधिकारिक रूप से इस्तीफा कॉर्पोरेशन सचिव को पत्र जमा करने के बाद प्रभावी होगा.
मेयर पद को लेकर नाराजगी
श्रीलेखा शुरू से ही मेयर पद न मिलने से नाराज रहीं. उन्होंने पहले कहा था कि वे कॉर्पोरेशन चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन पार्टी के बार-बार आग्रह और आश्वासन के बाद राजी हुईं. पार्टी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वे सिर्फ काउंसलर नहीं रहेंगी, बल्कि तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में भाजपा का चेहरा होंगी और मेयर पद के लिए भी विचार किया जाएगा.
भाजपा ने तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में ऐतिहासिक जीत हासिल कर 45 साल के लेफ्ट शासन को समाप्त किया था. पार्टी को 50 सीटें मिलीं. इसके बावजूद मेयर पद वी.वी. राजेश को दिया गया. श्रीलेखा ने चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बड़े अंतर से जीती थीं. पहले उन्होंने पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा था कि वे काउंसलर पद नहीं छोड़ेंगी क्योंकि लोगों ने उन्हें वोट दिया है, लेकिन अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है.
संख्या बल पर असर
तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन 101 सदस्यीय है. भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है. एक स्वतंत्र काउंसलर के समर्थन से मेयर चुनाव जीता गया था. अगर श्रीलेखा का इस्तीफा लागू होता है तो भाजपा के सदस्य घटकर 48 रह जाएंगे, जिससे पार्टी की स्थिति और कमजोर हो जाएगी. भाजपा नेतृत्व मामले में सक्रिय है और श्रीलेखा को मनाने तथा इस्तीफा वापस लेने की कोशिश कर रहा है. पार्टी के पास सोमवार तक का समय है.
श्रीलेखा का सफर
आर. श्रीलेखा केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी रहीं. 2020 में डीजीपी पद से रिटायर होने के बाद अक्टूबर 2024 में भाजपा में शामिल हुईं और राज्य इकाई की उपाध्यक्ष बनाई गईं. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा भी कर चुकी हैं. उनके इस कदम से केरल भाजपा में आंतरिक मतभेद की चर्चा तेज हो गई है.