Delhi Red Fort blast: नई दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को एक कार में विस्फोट हुआ था, जिसमें डॉक्टर उमर-उन-नबी ने खुद को उड़ा लिया. इस हमले में 12-15 लोग मारे गए और कई घायल हुए. जांच में सामने आया कि यह एक सुनियोजित आतंकी घटना थी, जिसमें शिक्षित लोग शामिल थे.
अब जांच एजेंसियों को पता चला है कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों का एक ग्रुप बड़े पैमाने पर साजिश रच रहा था. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, ये डॉक्टर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कॉफी चेन के आउटलेट्स को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे. इस चेन के संस्थापक यहूदी मूल के हैं. उनका मकसद इजरायल की गाजा में चल रही सैन्य कार्रवाई के खिलाफ दुनिया को एक मजबूत संदेश देना था.
गिरफ्तार आरोपी डॉक्टरों में जम्मू-कश्मीर के मुजम्मिल अहमद गनई और अदील अहमद राथर, साथ ही उत्तर प्रदेश की शाहीन सईद शामिल हैं. इनकी उमर-उन-नबी से टारगेट चुनने को लेकर असहमति थी. उमर-उन-नबी लाल किले जैसी हाई-प्रोफाइल जगह पर हमला करना चाहते थे, जबकि बाकी सदस्यों का झुकाव जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों तक सीमित रखने का था.
चार साल से सक्रिय था ग्रुप
यह पूरा ग्रुप पिछले चार साल से सक्रिय था और इसे 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' कहा जा रहा है. ये लोग अल-कायदा की भारतीय शाखा अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश में थे. एजीयूएच की शुरुआत जाकिर मूसा ने की थी, जो 2019 में मारे गए थे. इसका आखिरी कमांडर मुजम्मिल अहमद तांत्रे भी 2021 में एनकाउंटर में मारा गया. इन डॉक्टरों का लक्ष्य देश में इस्लामिक कानून लागू करना था.
एक पैम्फलेट से हुआ खुलासा
जांच की शुरुआत जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अक्टूबर 2025 में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के एक पैम्फलेट से की थी. इस जांच के दौरान फरीदाबाद में छापेमारी हुई, जहां 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और हथियार बरामद हुए. आरोपी डॉक्टरों ने ऑनलाइन वीडियो देखकर घरेलू केमिकल्स (जैसे यूरिया) से बम बनाने के प्रयोग किए थे, ताकि सामान आसानी से उपलब्ध हो और शक न हो.
उमर-उन-नबी ने शायद साथियों की गिरफ्तारी के बाद जल्दबाजी में करीब 40 किलोग्राम विस्फोटक इकट्ठा कर कार में रखा और हमला कर दिया. उनके फोन से बरामद वीडियो में वे सुसाइड बॉम्बिंग और 'शहादत' के बारे में बात करते दिखे हैं. यह घटना 'जैश-ए-मोहम्मद' और एजीयूएच से जुड़ी बताई जा रही है, और जांच अभी जारी है.