नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को फांसी के बजाय घातक इंजेक्शन, गोली मारकर या बिजली से दिए जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि फांसी को खत्म करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की 2017 की याचिका पर फैसला सुनाया.
याचिका में सीआरपीसी की धारा 354(5) को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया है कि मौत की सजा पाए व्यक्ति को गर्दन से फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए जब तक वह मर न जाए. याचिकाकर्ता का तर्क था कि फांसी से लंबा दर्द होता है और यह गरिमा के साथ मरने के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है.
अदालत ने कहा कि पुराने फैसले (दीना मामले) को बड़े बेंच को भेजने का पर्याप्त कारण नहीं है. हालांकि, अदालत ने साफ किया कि अगर भविष्य में वैज्ञानिक या मेडिकल सबूत सामने आते हैं कि कोई और तरीका कम दर्दनाक है, तो मुद्दे पर दोबारा विचार किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सुझाव दिया कि वह विशेषज्ञ पैनल बनाकर मौजूदा तरीके की समीक्षा कर सकता है. पैनल में कानून, फॉरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोसाइंस और अपराध विज्ञान के विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं. फिलहाल फांसी ही मौत की सजा देने का तरीका बनी रहेगी.