मल्लिकार्जुन खड़गे का रिमोट सोनिया के पास,बैटरी राहुल के पास? कैसे आगे बढ़ेगा गांधी पिरवार

Global Bharat 02 Oct 2022 3 Mins 44 Views
मल्लिकार्जुन खड़गे का रिमोट सोनिया के पास,बैटरी राहुल के पास? कैसे आगे बढ़ेगा गांधी पिरवार

बेटी का नाम इंदिरा गांधी, बेटे के नाम राहुल और प्रियांक गांधी रखा,खड़के सोनिया के वफादार हैं
एक तरफ राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा है, दूसरी तरफ कांग्रेस तोड़ो मिशन चल रहा है…हालात ये हो गए कि जिनको बनना था कांग्रेस का राजा हो प्रजा की तरह हांफने लगे, जिनका कहीं नहीं था नाम उनको वफादारी का ईनाम मिल गया…एक तरफ मोदी जैसा विशाल कद है दूसरी तरफ खड़गे कौन है? UP, बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश में कितने लोग जानते है? लेकिन सचिन पायलट जैसे बागी को अध्यक्ष बना नहीं सकते है, फिर वफादार को ही बनाना पड़ेगा

दलित परिवार में पैदा हुए मल्लिकार्जुन खड़गे का परिवार देश का दूसरा गांधी परिवार कहा जा सकता है, क्योंकि वफादारी के लिए अपनी बेटी का नाम इंदिरा गांधी के नाम पर रखा, इंदिरा को प्रियदर्शनी कहा जाता था, तो खड़गे ने अपनी बेटी का नाम प्रियदर्शनी ही रखा, बेटे का नाम राहुल गांधी है, और दूसरे बेटे का नाम प्रियंका गांधी की जगह प्रियांक है! सोनिया गांधी भी जानती है कि मोदी के रहते खड़गे को अध्यक्ष बनाना मतलब उनकी बलि चढ़ाने जैसा है? दिग्विजय सिंह और शशि थरूर के बजाय अचानक खड़गे की एंट्री के पीछे एक गहरा राज़ है, शायद ये बात कांग्रेस के कार्यकर्ता भी न जानते हो! राहुल गांधी के ख़ास मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया BJP में जाएंगे ऐसा किसी ने नहीं सोचा था, यहां तक कि संसद में राहुल, सिंधिया एक साथ बैठते और एक जैसी ही जैकेट पहनते, फिर भी बीजेपी गांधी परिवार के आंगन में घुसकर उनका दुलारा उठा लाई, शशि थरूर का बयान आप देखेंगे तो लगेगा ये बीजेपी का विरोध करते होंगे मोदी का विरोध नहीं करते है,

दिग्विजय सिंह से भी बाहर बीजेपी से रिश्ते खराब है लेकिन अंदर दिग्विजय बीजेपी के बेहद ख़ास है, ऐसे में दो नाम बचते ही थे, पहला नाम था अशोक गहलोत का, जिन्होंने बागावत कर बता दिया कि कांग्रेस का अध्यक्ष बनें तो फिर क्या होगा किसी को पता नहीं है, दूसरा है गाय की तरह सज्जन खड़गे जिनको जितना कहा जाएगा उतना ही बोलेंगे, यानि आप कांग्रेस में दूसरा मनमहोन सिंह खड़गे को मान सकते है….दिग्विजय सिंह एक समय में ख़ासकर 2012 के यूपी चुनाव के दौरान गांधी परिवार और ख़ासकर राहुल गांधी के बहुत क़रीब थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में गांधी परिवार और दिग्विजय सिंह के बीच में दूरियां बढ़ गईं थीं. दिग्विजय सिंह कई तरह के विवादास्पद बयान देते थे, जो कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बहुत नुकसान पहुंचाने वाले होते थे. इसलिए गांधी परिवार को उन पर पूरा विश्वास नहीं था…खड़गे दक्षिण के बड़े दलित नेता हैं लेकिन उनके अध्यक्ष बनने एक भी सीट दक्षिण में नहीं बढ़ने वाली है, अब आपको एक और मज़ेदार बात बताते हैं, देश की सबसे पुरानी पार्टी के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, ये बात जब तक मन हो दबा लें लेकिन एक दिन बाहर ज़रूर आएगी,

गहलोत की बगावत के बाद 28 सितंबर को राहुल गांधी ने दिग्विजय को फोन कर दिल्ली बुलाया और अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने को कहा, फिर 29 की रात को ही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी में एक बात हुई जिसमें फैसला हुआ कि खड़गे को अध्यक्ष बनाएंगे? मतलब परिवार ही नहीं तय कर पा रहा है कि अध्यक्ष कौन होगा? साल 1977 में जब आपातकाल लगा और अगले साल 1978 में चुनाव हुए तो बड़े-बड़े कांग्रेसी हारे लेकिन खड़गे जीत गए, यहां तक कि इंदिरा गांधी को अपनी सियासत बचाने के लिए कर्नाटक से ही चुनाव लड़ना पड़ा था, वो भी राहुल की गांधी की तरह यूपी में अपना गढ़ हार गईं थीं. कहते हैं दिल्ली की सत्ता में चाहे इंदिरा गांधी रहीं या राजीव गांधी हर वक्त खड़गे ने खुद को वफादार साबित किया, गांधी परिवार से खड़गे को इतना प्यार है कि उन्होंने कभी भी किसी बात के लिए मना नहीं किया, अपने 80 साल के उम्र में 9 बार विधायक और दो बार सांसद बने, 5 बार सीएम बनने से चुके लेकिन कभी भी कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाया….इसलिए जब मोदी 75 साल की राजनीति की उम्र तय कर रहे हैं तब कांग्रेस 80 साल के बुढे नेता को अध्यक्ष की कुर्सी दे रही है। यूपी के पूर्वांचल में कहते है युवा नेता भूजे भांटा, अनुभवी नेता चलेगा चाल

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