लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मथुरा के मांट से आठ बार विधायक रहे पंडित श्याम सुंदर शर्मा की कांग्रेस में वापसी ने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है. तीन अक्टूबर को उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली. शर्मा पहली बार 1989 में कांग्रेस के टिकट पर मांट से विधायक बने थे. इसके बाद 1991 और 1993 में भी कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की. बाद में उन्होंने अलग-अलग दलों के टिकट पर अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी और आठ बार मांट से विधानसभा पहुंचे.
उनकी राजनीतिक यात्रा में टीएमसी और बसपा का दौर भी रहा. 2012 में रालोद के जयंत चौधरी से चुनाव हारने के बाद उपचुनाव में टीएमसी के टिकट पर फिर विधानसभा पहुंचे. 2017 में बसपा के टिकट पर जीतकर आठवीं बार विधायक बने. हालांकि, 2022 में बीजेपी के राजेश चौधरी से उन्हें 9,580 वोटों से हार मिली. अक्टूबर 2024 में बसपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था.
कांग्रेस में शर्मा की वापसी ऐसे समय हुई है, जब पार्टी यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज कर रही है. हाल ही में आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी के संगठनात्मक बदलाव में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है.
शर्मा की एंट्री को कांग्रेस के लिए सिर्फ एक नेता की वापसी के तौर पर नहीं, बल्कि पुराने राजनीतिक नेटवर्क और जमीनी अनुभव को जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. मांट में आठ बार विधायक रहने का उनका रिकॉर्ड उनकी क्षेत्रीय राजनीतिक मौजूदगी को रेखांकित करता है.
इसी बीच कांग्रेस और सपा के बीच 2027 के लिए सीट बंटवारे को लेकर बातचीत और राजनीतिक बयानबाजी जारी है. ऐसे में कांग्रेस का बड़ा दावा है कि वह अपने संगठन और राजनीतिक आधार को विस्तार देना चाहती है. पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में कुछ और नेताओं के कांग्रेस में आने की चर्चा है. तिहाई से कम सीटों पर समझौता न करने की बात भी पार्टी के भीतर कही जा रही है, हालांकि अंतिम सीट बंटवारा आधिकारिक बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा.