राहुल गांधी की कराटे वाली वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, कोई तारीफ कर रहा है, तो कोई कह रहा है आपके पास जेड प्लस सिक्योरिटी है फिर कराटेबाज क्यों बन रहे हैं. लेकिन मायावती ने गुस्से में ऐसा पलटवार किया है कि कांग्रेस नेताओं के होश उड़ जाएंगे, मायावती ट्वीट कर लिखती हैं... पेट भरे लोगों के लिए डोजो व अन्य खेलकूद के महत्व से किसी को इंकार नहीं, लेकिन गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई व पिछड़ेपन से जूझ रहे उन करोड़ों परिवारों का क्या जो पेट पालने के लिए दिन-रात कमरतोड़ मेहनत को मजबूर हैं. ’भारत डोजो यात्रा’ क्या उनका उपहास नहीं? खेल का राजनीतिकरण हानिकारक है.
यही बात उन नेताओं को भी कहा जाता है, जो खेल से राजनीति में आते हैं, चाहे वो गौतम गंभीर जैसे दिग्गज हों या हरभजन सिंह और युसूफ पठान जैसे लोग, जो पहले क्रिकेट जगत के सितारे रहे, बाद में सियासत में चमकने लगे. पर इन्होंने कभी भी राहुल गांधी की तरह डोजो यात्रा या किसी और यात्रा की बात नहीं की, पर कांग्रेस ने जब डोजो यात्रा के बारे में लिखा तो ऐसा लगा जैसे भारत जोड़ो यात्रा का जोड़ो शब्द गलती से डोजो लिखा गया है, पर वीडियो देखकर बाद में समझ आया राहुल न सिर्फ कराटा सीखा रहे हैं, बल्कि वो खुद भी कराटे की ट्रेनिंग ले रहे हैं, यहां डोजा का मतलब होता है मार्शल आर्ट सीखने वाली जगह. तो सवाल ये भी उठता है कि राहुल गांधी को खतरा किससे है. दो महीने पहले ही ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष शिवानंद रॉय ने एक मुकदमा दर्ज करवाया था, जिसमें एक व्यक्ति ने धमकी दी थी कि अगर राहुल गांधी ओडिशा के दौरे पर आते हैं, तो मैं गोडसे बन जाऊंगा, और जो महात्मा गांधी के साथ हुआ, वही करूंगा.
लेकिन कराटे वाला वीडियो ऐसे धमकीबाजों के लिए नहीं था, ऐसे लोगों के लिए तो पुलिस पहले से मौजूद है, राहुल गांधी के पास जेड प्लास की सिक्योरिटी भी है, जिसमें शामिल जवान इतने ट्रेंड हैं कि वो राहुल तक पहुंचने से पहले ही आरोपियों को ऊपर पहुंचा देते हैं, फिर सवाल ये है कि इस वीडियो में कौन से 3 संदेश छिपे हैं.
पर सवाल इस बात का है कि राहुल गांधी क्या राहुल गांधी दुग्गल साहब हैं, जैसे फिल्म में कादर खान कभी भी कुछ भी बन जाते थे, वैसे ही राहुल गांधी कभी कुली तो कभी ड्राइवर तो कभी कराटा मैन क्यों बन जा रहे हैं, वैसे तो पूरी कांग्रेस अक्षय कुमार के इंटरव्यू पर सवाल उठाती है, पर यही राहुल जब अक्षय की तरह कराटामैन बनते हैं तो हर कोई ताली बजाने लगता है, एक नेता के तौर पर राहुल गांधी के पास इतनी फुर्सत है ये अच्छी बात है, पर देश को जोड़ने की बात करके देश तोड़ने का सपना देखने वालों का साथ देना कहीं से जायज नहीं लगता. आज राहुल गांधी और उनकी पूरी कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में किससे गठबंधन कर रही है, जेएनयू में नारे लगाने वाले कन्हैया कुमार को कांग्रेस में क्या पद मिलता है, सब जानते हैं, ये बस एक दो उदाहरण हैं, बाकी आप अपने हिसाब से बताइए राहुल की जोड़ो यात्रा जो डोजो यात्रा में बदल गई है, वो आने वाले दिनों में और किस रूप में बदलने वाली है.