लखनऊ : तारीख थी, 5 जुलाई, 2011. जगह- मुरादाबाद का मैनाठेर थाने का एक गांव. छेड़छाड़ के आरोपी को पकड़ने पुलिस की टीम पहुंचती हैं, लेकिन वहां कुछ लोग ये शोर मचा देते हैं कि पुलिस ने एक धार्मिक पुस्तक का अपमान किया है. नतीजा भीड़ सड़क पर उतर आती है, 6 जुलाई को मैनाठेर थाने पर पत्थऱ फेंके जाने लगते हैं, उसे आग के हवाले कर दिया जाता है. मामला बढ़ता देख तात्कालीन एसएसपी अशोक कुमार सिंह और डीएम राजशेखर तुरंत मौके पर पहुंचते हैं और पुलिस वाला माइक जिसे लाउड हेलर कहते हैं, उससे भीड़ को समझाने की कोशिश करते हैं, पर भीड़ नहीं मानती. बल्कि पथराव करने लगती है, जिसे देखते ही डीएम राजशेखर अपनी गाड़ी से तुरंत निकल जाते हैं, पर एसएसपी वहीं मोर्चा संभालने की कोशिश करते हैं.
नतीजा धीरे-धीरे एसएसपी भीड़ से घिर जाते हैं, और फिर उनके साथ जो होता है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. किसी का हाथ उनकी वर्दी पर पड़ता है तो कोई उनकी जान लेने पर उतारू था, भीड़ में मौजूद लोग उन्हें अधमरा छोड़कर भाग जाते हैं. उस वक्त की हालत देखिए कि करीब 2 घंटे बाद एसएसपी अशोक कुमार सिंह तक मदद पहुंची, तात्कालीन आईजी रेंज एमके बशाल भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे, तब जाकर उन्हें भीड़ से छुड़ाया गया, अस्पताल में भर्ती कराया गया.
करीब एक महीने तक वो उनका इलाज मुरादाबाद से चला, फिर AIIMS से इलाज करवाना पड़ा, पर आरोपियों को पकड़ने के लिए न तो ऑपरेशन लंगड़ा चला, न अभी की तरह कोई बुलडोजर एक्शन हुआ. क्योंकि, तब यूपी की मुख्यमंत्री हुआ करतीं थीं मायावती, जिनके जूते अधिकारी साफ करते थे, पर अधिकारियों पर एक खास समुदाय के लोग हाथ डाल दें तो उन अधिकारियों को बचाने कोई आगे नहीं आता था.
इस मामले की जानकारी भी जब मायावती तक पहुंची तो उन्होंने तीन एक्शन लिए. तात्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ब्रजलाल को दिनों तक मुरादाबाद में कैंप करने भेजा.
तीसरा- IPS एसोसिएशन ने डीएम राजशेखर की शिकायत CM से की, नतीजा घटना के 2 दिन बाद ही मुरादाबाद के डीएम राजशेखर को वहां से हटा दिया गया.
मैनाठेर में 6 जुलाई, 2011 को मुरादाबाद के एसएसपी अशोक सिंह पर सपा के मुसलमानों ने योजनाबद्ध तरीके से हमला किया था. भीड़ ने एसएसपी अशोक सिंह और एसआई रवि कुमार को मरा समझ कर छोड़ा था. इस हमले के मुकदमें में चार्जशीट लगाई गई, जिसको मुख्यमंत्री बनते ही अखिलेश यादव ने वापस ले लिया. हालंकि, उसे कोर्ट ने नहीं माना. करीब 15 साल बाद इस मामले में फैसला आया तो मोहम्मद अली, कासिम, तहजीब आलम, जाने आलम, मोहम्मद युनूस और मोहम्मद नाजिम समेत 16 आरोपियों को उम्रकैद मिली.
जबकि, आईपीएस अशोक सिंह फिलहाल लखनऊ में एडीजी पद पर सेवाएं दे रहे हैं, जिनका जिक्र कर सीएम योगी आदित्यनाथ भावुक हो उठते हैं. भले ही योगी ने इनका नाम नहीं लिया, पर पूरा प्रदेश जानता है जब मुरादाबाद में ये घटना हुई तो कैसे पुलिस का मोरल डाउन हुआ, सिपाही और दारोगा क्यों माफियाओं पर हाथ डालने से बचने लगे थे, पर अब दौर बदल चुका है, अब तो योगी आदित्यनाथ खुद कहते हैं मेरा फेवरेट विषय ही माफियाओं से कब्जा छुड़वाना है.