15-15 करोड़ में खरीदे हमारे सांसद, संजय राउत ने किसे दी ऑन कैमरा गाली ?

Global Bharat 17 Jun 2026 11:52: PM 2 Mins
15-15 करोड़ में खरीदे हमारे सांसद, संजय राउत ने किसे दी ऑन कैमरा गाली ?

नई दिल्ली : 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नारा दिया था कि अबकी बार 400 पार. जनता ने इसे नकार दिया और बीजेपी को बहुमत से भी कम सीटें जीतवाई, 240 सीटों पर कमल सिमट गया. नतीजा नायडू और नीतीश की पार्टी के गठबंधन से सरकार बनी. ऐसे में कई काम बीजेपी संसद से नहीं करवा पा रही है, जो उनके एजेंडे में थे. चाहे वो यूनिफॉर्म सिविल कोड हो या फिर कोई दूसरा मुद्दा. नतीजा राजनीति के जानकार ये कहने लगे हैं कि बीजेपी ज्यादा से ज्यादा सांसदों को अपने पाले में करने का प्लान बना रही है. वरना सोचिए जो सांसद अब तक पार्टी नहीं छोड़ रहे थे, वो अचानक से इतने बागी कैसे हो गए.

 ताजा अपडेट महाराष्ट्र का है, जहां शिवसेना (यूबीटी) जो उद्धव ठाकरे का है, उसके 6 सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखकर शिंदे गुट में शामिल होने की बात कही है. ये वही शिंदे गुट है, जिसके समर्थन से महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस की सरकार चल रही है, तो संसद में इससे एनडीए सांसदों की संख्या बढ़ जाएगी. फिर कोई भी बिल या संविधान में संशोधन का मुद्दा अगर उठा तो मुश्किल नहीं आएगी, शायद यही वजह है कि संजय राऊत अपना आ खो चुके हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में गाली देते हुए कहते हैं. ये शब्द एडिट मत करना.

महाराष्ट्र से पहले बंगाल में भी हुआ, जहां ममता बनर्जी की सबसे करीबी सांसद सायोनी घोष ने अचानक पाला बदल लिया. उन पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कई गंभीर आरोप लगाए. ममता ने खुले तौर पर कुछ नहीं कहा, बस मीटिंग में एक बार कहा कि अपनों ने ही बड़ा धोखा दिया है, जो ये बता रहा है कि विपक्षी पार्टियों के नेता अब घबराने लगे हैं. यूपी में अखिलेश यादव जनता को ये डर दिखाने लगे हैं कि अगर 2027 वाले चुनाव में बीजेपी को जीता दिया तो फिर चुनाव ही नहीं होंगे.

 एक ही पार्टी अगर कई बरस तक चुनाव जीत रही है तो क्या लोकतंत्र खतरे में आ सकता है. वैसे तो कांग्रेस ने भी देश पर कई दशक राज किया, उस वक्त क्या किसी विपक्षी नेता ने लोकतंत्र के खतरे में होने की बात कही. अगर नहीं तो फिर इस वक्त ऐसा नैरेटिव क्यों गढ़ा जा रहा है, इसके पीछे की वजह क्या हो सकती है. क्या सभी विपक्षी पार्टियां मिलकर बीजेपी को कमजोर करने के लिए नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश में है. जैसा साल 2024 के चुनाव में हुआ, या फिर सच में इन्हें डर लग रहा है. 

संजय राउत तो ये तक कहते हैं कि 15-15 करोड़ का लालच देकर हमारे सांसद खरीदे गए, इससे पहले अरविंद केजरीवाल कहा करते थे. हमारे विधायकों को ईडी-सीबीआई का डर दिखाया जा रहा है, यहां तक कि देश के इतिहास में शायद पहली बार चुनाव आयोग पर इतने गंभीर आरोप लगने शुरू हुए हैं. राहुल गांधी वोट चोरी का मुद्दा अब भी पकड़े हुए हैं और इमरान मसूद बार-बार ये कह रहे हैं कि सभी विपक्षी पार्टियों को राहुल का हाथ थाम लेना चाहिए. क्या राहुल गांधी बीजेपी से लड़ने में सक्षम हैं, उनका राजनीतिक इतिहास तो यही कहता है कि हर बार उन्हें हार ही मिली है.

 कुछ नतीजों को छोड़ दें तो कभी जनता ने उन पर पूरी तरह भरोसा नहीं जताया. ऐसे में आप तय कीजिए कि ऑपरेशन लोट्स चल रहा है या फिर अपनी पार्टी के परफॉर्मेंस परेशान होकर सांसद-विधायक पार्टी छोड़ रहे हैं.

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