लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मानसून का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है. प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है, जबकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश से मामूली राहत मिल रही है. मौसम विभाग के अनुसार मानसून बिहार सीमा तक पहुंच चुका है और 20 से 25 जून के बीच सोनभद्र के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकता है. मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि इस बार मानसून की गति धीमी पड़ने का मुख्य कारण ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली जेट स्ट्रीम हवाएं हैं.
सामान्य स्थिति में ये हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं, लेकिन इस बार इनके दक्षिण की ओर खिसकने से मानसूनी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. वर्तमान में मानसून तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र के आसपास लगभग एक सप्ताह से ठहरा हुआ है.
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पंजाब से बिहार तक बनी ट्रफ लाइन के प्रभाव से प्रदेश में अगले तीन दिनों तक कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. हालांकि, यह बारिश सीमित क्षेत्रों तक ही रहेगी. वहीं दक्षिणी उत्तर प्रदेश में गर्म पछुआ हवाओं के कारण अगले चार से पांच दिनों तक लू चलने की संभावना बनी हुई है.
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर रह सकता है. सामान्यतः उत्तर प्रदेश में जून से सितंबर के बीच 820 से 840 मिमी वर्षा होती है, लेकिन इस बार बारिश सामान्य से लगभग 8 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है. कृषि मंत्रालय ने भी खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं.
हालांकि 18 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिससे मौसम में कुछ बदलाव संभव है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाओं का प्रवाह बढ़ता है तो मानसून को गति मिल सकती है. फिलहाल प्रदेश में मानसून के प्रवेश के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं मानी जा रही हैं.