राजस्थान ; बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू को एक बार फिर राहत मिली है. राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें 20 दिन की नियमित पैरोल देने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार पैरोल आवेदन खारिज करने के लिए पर्याप्त और ठोस कारण नहीं बता सकी, इसलिए आसाराम को निर्धारित शर्तों के साथ रिहा किया जाए.
आसाराम वर्ष 2013 में जोधपुर स्थित अपने आश्रम में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए थे. 2018 में विशेष अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मई 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा था. हालांकि, अदालत ने गैंगरेप और आपराधिक साजिश की धाराओं से उन्हें राहत दी, लेकिन दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत दोषसिद्धि को सही माना था.
इससे पहले भी आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अंतरिम जमानत और अस्थायी राहत मिलती रही है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उनकी सजा पर रोक लगाने या नियमित जमानत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया था कि बिना राज्य सरकार का पक्ष सुने कोई अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी, जब तक जीवन के लिए गंभीर चिकित्सकीय खतरा साबित न हो.
अब राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दी गई यह 20 दिन की नियमित पैरोल उनके लिए पहली नियमित पैरोल मानी जा रही है. अदालत के आदेश के बाद उन्हें निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत जेल से अस्थायी रूप से रिहा किया जाएगा. इस फैसले के बाद एक बार फिर गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदियों को पैरोल दिए जाने को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है.