काठमांडू: नेपाल की राजनीति में बुधवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार को झटका देते हुए गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तथा किसी भी संभावित हितों के टकराव से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है. यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब गुरुंग पर कुछ विवादित व्यावसायिक संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे थे.
खासतौर पर व्यवसायी दीपक भट्ट, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच चल रही है, के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर विपक्ष और मीडिया दोनों ने मुद्दा उठाया. इसके अलावा, उन पर अपनी संपत्ति के विवरण में कुछ निवेशों जैसे बीमा कंपनियों और शेयरों की जानकारी पूरी तरह से सार्वजनिक न करने के आरोप भी लगे. गुरुंग ने अपने बयान में कहा कि हाल में उनके वित्तीय निवेशों को लेकर जो सवाल उठे हैं, उन्हें उन्होंने गंभीरता से लिया है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप और सच्चाई में फर्क होता है, और किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और पार्टी के हर निर्णय का पालन करेंगे. विवाद का एक अहम पहलू यह भी था कि गृह मंत्री के तौर पर वही पुलिस तंत्र उनके अधीन था, जो उनके कथित व्यावसायिक सहयोगियों के खिलाफ मामलों की जांच कर रहा था. ऐसे में हितों के टकराव की आशंका और अधिक गहरा गई थी.
इस बीच, यह घटना सरकार के भीतर बढ़ती दबाव की स्थिति को भी दिखाती है. बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार में हाल के दिनों में यह दूसरा इस्तीफा है. इससे पहले भी एक मंत्री को अनुशासनहीनता और पद के दुरुपयोग के आरोपों के चलते हटाया जा चुका है. कुल मिलाकर, यह मामला न सिर्फ व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित है, बल्कि नेपाल की मौजूदा सरकार की पारदर्शिता, जवाबदेही और राजनीतिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े करता है.