नोएडा : क्या यूपी में बड़ी साजिश हो रही है या सरकार को अस्थिर करने का प्लान है. यूपी का इकोनॉमी कैपिटल नोएडा में पूरे दिन भयंकर बवाल हुआ. आगजनी हुई. चक्काजाम हुआ और जमकर तोड़-फोड़ भी हुआ. मजदूरों के नाम पर जमकर गदर काटा गया. बवाल की जांच हुई तो सामने आया कि हरियाणा का फैसला महज ढाल था, इसके पीछे सरकार हिलाने की गहरी साजिश थी. नोएडा पुलिस कमिश्नर के अनुसार मजूदरों के प्रोटेस्ट के लिए रातों-रात हजारों ग्रुप बनाए गए. सभी को क्यूआर कोड से जोड़ा गया. प्री प्लानिंग के तहत हिंसा भड़काई गई. बवाल काटने वाले कोई श्रमिक नहीं है. पूरी कहानी बताए, उससे पहले जान लें नोएडा में असल में क्या हुआ.
नोएडा में सोमवार की सुबह अलग-अलग 83 स्थानों पर 42 हजार मजदूरों ने प्रदर्शन शुरू किया. उनकी मांग थी कि हरियाणा सरकार ने 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि यहां भी लागू हो. ओवरटाइम पर दोगुना पैसा मिले. बोनस खाते में भेजा जाए. साप्ताहिक छुट्टी व काम पर दोगुना भुगतान किया जाए. सुरक्षा का ध्यान रखा जाए. खैर, ये मांगे मजदूरों की थी, लेकिन हिंसा करने वाले साज़िशकर्ताओं की नहीं. साजिशकर्ताओं को मजदूरों की आड़ में प्री प्लान कांड को अंजाम देना था.
5 जगहों पर हुआ बवाल
नोएडा व गाजियाबाद में मजदूरों के प्रदर्शन में 83 जगह प्रदर्शन हुए. 78 जगहों पर माहौल शांत रहा, लेकिन 5 जगहों पर भयंकर बवाल हुआ. इसमें 50 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. 150 से अधिक वाहनों में तोड़फोड़ भी की गई. पुलिस ने 150 लोगों को हिरासत में लिया है, जहां इनसे पूछताछ में अहम सबूत हाथ लगे हैं. नोएडा कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मुताबिक धरने की आड़ में साजिश थी.
रातों-रात तैयार हुआ हजारों ग्रुप
रातों-रात हजारों व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए.क्यूआर कोड कर माध्यम से मजदूरों को जोड़ा गया. ग्रुप बनाने वालों ने कर्मचारियों को हिंसक प्रदर्शन के लिए उसकाया. सोशल मीडिया का सहारा लेकर आग को हवा दिया गया. पुलिस के अनुसार कई जगहों पर मजदूर पुलिस के समझाने के बाद मान गए थे. इसी बीच बॉर्डर के आस-पास के गांव से कुछ बाहरी लोग आए और हिंसा बढ़ गई. मामले की तह तक जाया जाएगा. हिंसाकर्ताओं की तलाश जारी है.
नहीं सामने आया राजनीतिक दल का नाम
सूत्र बताते है कि हरियाणा में हुए हिंसा के बाद यूपी पुलिस एक्टिव थी, लेकिन उसके बाद भी नोएडा प्रदर्शन की आग में सुलग गया. अभीतक इस पूरे प्रोटेस्ट का कोई लीडर सामने नहीं आया है. मजदूरों के प्रदर्शन में अभीतक किसी राजनीतिक दल का नाम सामने नहीं आया है. पुलिस प्रदर्शन को साजिश के तहत देख रही है और जांच कर रही है.