नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के दौरान वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले लोगों की समस्याओं पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि वोट ले लिया गया है, इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे सरकारी सेवाएं और कल्याणकारी योजनाएं भी छीन ली जाएंगी. चीफ जस्टिस एस. सूर्या कांत, जस्टिस जोयमलया बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के SIR कमेटी चेयरपर्सन प्रशांत बोस की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग (ECI), बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम कटने के खिलाफ करीब 34 लाख अपील लंबित हैं, जबकि अब तक सिर्फ 38,000 अपीलों पर ही सुनवाई हो पाई है. उनमें से करीब 70% अपील स्वीकार की गई हैं. वकील ने कहा कि अपीलीय ट्रिब्यूनल्स की प्रक्रिया धीमी है, SOP सार्वजनिक नहीं किया गया है और न ही आदेश ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम कटने का मतलब नागरिकता चले जाना नहीं है. जस्टिस बागची ने कहा कि अगर ECI को किसी की नागरिकता पर संदेह है तो मामला गृह मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए. ECI नागरिकता तय करने का अधिकारी नहीं है.
महत्वपूर्ण बात यह रही कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट का ध्यान उन रिपोर्ट्स की ओर दिलाया जिनमें दावा किया गया है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद महिलाओं की पेंशन, राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बंद किया जा रहा है. वकील ने कहा, ''आपने वोट ले लिया है, अपील तय होने तक यह चलेगा, लेकिन बाकी सेवाएं नहीं छीनी जानी चाहिए.'' कोर्ट ने इस मुद्दे पर भी सख्ती दिखाई और राज्य सरकार द्वारा मई 2026 के बाद जारी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, अन्नपूर्णा योजना और जाति सत्यापन से जुड़े आदेशों पर सवाल उठाए.
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय प्रक्रिया को तेज करने, SOP सार्वजनिक करने, समयबद्ध तरीके से अपीलों का निपटारा करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश मांगे हैं. मामले की अगली सुनवाई का इंतजार अब ECI और बंगाल सरकार के जवाब पर है. यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है जिनके वोटिंग अधिकार पर सवाल उठने के साथ-साथ रोजमर्रा की सरकारी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं.