नई दिल्ली: केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में एक नया बिल पेश करने जा रही है, जो 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गान, तिरंगे और संविधान के समान कानूनी सुरक्षा देगा. 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) बिल' के अनुसार, वंदे मातरम का अपमान करने, उसके गायन में बाधा डालने या व्यवधान पैदा करने पर 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. सरकार इस बिल के जरिए 1971 के कानून में संशोधन करना चाहती है.
फिलहाल यह कानून राष्ट्रीय गान 'जन गण मन', राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर लागू है. नया बिल वंदे मातरम को भी इसी दायरे में लाएगा. सरकार इस बिल को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर ला रही है.
कुछ महीने पहले गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया था कि जहां राष्ट्रीय गान बजाया जाए, वहां वंदे मातरम भी अनिवार्य रूप से बजाया या गाया जाए. इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने एक और पत्र जारी कर कहा कि जहां दोनों गीत गाए जाएंगे, वहां वंदे मातरम पहले गाया जाएगा. साथ ही पूरे 6 छंद (लगभग 3 मिनट 10 सेकंड) गाने पर जोर दिया गया.
पुराना विवाद फिर गरमाएगा?
बिल के आने से BJP और कांग्रेस के बीच पुराना विवाद फिर भड़कने वाला है. 1937 में कांग्रेस ने वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो छंदों को स्वीकार किया था. BJP इसे तुष्टीकरण की राजनीति बताती है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर समेत कई नेताओं की सहमति से लिया गया था.
BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम वंदे मातरम से नफरत करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कह चुके हैं कि वंदे मातरम को कमजोर करने की कोशिशों ने देश विभाजन की नींव रखी. अगले सप्ताह संसद में इस बिल पर जोरदार बहस होने की संभावना है. BJP का कहना है कि बिल का मकसद सिर्फ गीत को कानूनी दर्जा देना है, न कि पुराने विवादों को दोहराना.