यूपी चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का बड़ा ऑफर! AIMIM गठबंधन के लिए तैयार, कांग्रेस असमंजस में और सपा अलर्ट मोड पर

Amanat Ansari 21 Sep 2026 07:50 PM 2 Mins
यूपी चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का बड़ा ऑफर! AIMIM गठबंधन के लिए तैयार, कांग्रेस असमंजस में और सपा अलर्ट मोड पर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की पेशकश कर दी है. ओवैसी ने साफ कहा है कि जो दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं, उन्हें AIMIM के साथ आना चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पार्टी 2 अक्टूबर तक गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला कर लेगी. इस प्रस्ताव ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है.

कांग्रेस क्यों है असमंजस में?

कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोटों का सवाल बेहद अहम है. पार्टी राज्य में अपना अलग जनाधार मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, जबकि सपा लंबे समय से मुस्लिम-यादव समीकरण पर निर्भर रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों दलों ने मिलकर लड़ा था और अभी भी वे विपक्षी साझेदार हैं. लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले दोनों अपने संगठन और सामाजिक आधार को बढ़ाने में लगे हैं.

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस चिंता को खुलकर सामने रखा. उन्होंने कहा कि मुख्य लक्ष्य BJP को हराना होना चाहिए. सिर्फ मुस्लिम वोटों के सहारे भाजपा को नहीं हराया जा सकता. मसूद के मुताबिक, अगर AIMIM 4-5 सीटें भी जीत लेती है तो सवाल यह है कि उसका फायदा किसे होगा. उन्होंने आशंका जताई कि अगर AIMIM की मौजूदगी से विपक्षी वोट बंटे और आखिर में BJP की सरकार बन गई तो राजनीतिक मकसद पूरा नहीं होगा.

मसूद ने यह भी कहा कि हैदराबाद और उत्तर प्रदेश की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए हैदराबाद वाले फॉर्मूले को यूपी पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता. सपा भी इस पूरे मामले को लेकर अलर्ट है. अगर AIMIM अलग चुनाव लड़ती है तो कुछ सीटों पर विपक्षी वोट बंट सकते हैं. वहीं गठबंधन होने पर ओवैसी को उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने का ज्यादा मौका मिल सकता है.

BJP के हमले की आशंका

सबसे बड़ी चिंता बीजेपी के संभावित हमले की है. कांग्रेस नेताओं को डर है कि अगर AIMIM अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ती है तो भाजपा इसे विपक्षी वोटों के बंटवारे के रूप में पेश करेगी. अगर कांग्रेस या सपा ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन करती हैं तो बीजेपी इसे ‘अल्पसंख्यक केंद्रित राजनीति’ का आरोप लगाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है.

AIMIM का यूपी में रिकॉर्ड

AIMIM का उत्तर प्रदेश में अब तक का चुनावी रिकॉर्ड सीमित रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. हालांकि, इसके बाद पार्टी ने राज्य में संगठन मजबूत करने और 2027 के चुनाव के लिए ज्यादा सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है. इस बीच राजनीतिक दिलचस्प मोड़ यह भी है कि AIMIM के उत्तर प्रदेश के प्रमुख चेहरे और राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं.

वकार ने कांग्रेस में आने के बाद विपक्षी दलों से बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी और AIMIM पर विपक्षी एकता कमजोर करने का आरोप लगाया था. ओवैसी लगातार गठबंधन की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. अब 2 अक्टूबर की तारीख अहम हो गई है, जब AIMIM अपने संभावित गठबंधन को लेकर फैसला करेगी. यूपी की राजनीति में आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.

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