नई दिल्ली: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी ने सच्चाई जानने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था. इस दल में सांसद वीरेंद्र सिंह सहित कई नेता शामिल थे, जो घाट और आसपास के इलाकों का जायजा लेने जा रहे थे. लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया.
कारण बताया गया, ''गणतंत्र दिवस की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक वजहें''. इसके विरोध में सपा नेताओं ने सड़क पर धरना दे दिया और पुलिस से तीखी बहस हुई. अखिलेश यादव ने इस घटना पर तीखा हमला बोला.
उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर एक फोटो शेयर करते हुए लिखा कि सपा डेलीगेशन सिर्फ यह जांचने गया था कि जो वीडियो-फोटो वायरल हो रहे हैं, वे एआई जनरेटेड हैं या वास्तविक सच्चाई. उन्हें रोकना चोर की दाढ़ी में तिनका वाली बात है.
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा विनाश का दूसरा नाम बन चुकी है. ये लोग मंदिरों को तोड़ रहे हैं, पूजनीय वृक्षों की जड़ें उखाड़ रहे हैं. अहंकार का ऐसा भूकंप देश की सदियों पुरानी धरोहर और धार्मिक पहचान को मिटाने पर तुला है. ये वही लोग हैं जो आजादी के समय साम्राज्यवादियों के साथ खड़े थे. अब इनके मुखौटे उतारने और सच सामने लाने का वक्त है.
यह पूरा मामला तब और गरमा गया जब योगी सरकार ने पहले वायरल सामग्री को एआई से बनी बताया था और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे. सपा का कहना है कि वे सिर्फ हकीकत जांचने गए थे, लेकिन रोकना साजिश का सबूत है.