केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला लिया है. इसी के साथ जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल की ताकत और ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें दिल्ली के राज्यपाल के बराबर ही शक्ति दे दी गई है. जानकारी मिली है कि गृह मंत्रालय ने ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’ में बदलाव करने का निर्णय लिया है. इस फैसले के बाद अब दिल्ली की तरह ही जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल भी अधिकारियों का तबादला और पोस्टिंग कर सकते हैं.
इस बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को अब पुलिस, कानून व्यवस्था, एआईएस से जुड़े मामलों में ज्यादा अधिकार होंगे. साथ ही अब महाधिवक्ता, कानून अधिकारियों की नियुक्ति और मुकदमा चलाने की अनुमति देने या इनकार करने या अपील दायर करने से संबंधित प्रस्ताव पहले उपराज्यपाल के सामने रखे जाएंगे और उनकी सहमति पर निर्णय लिए जाएंगे. ज्ञात रहे कि अभी राज्य के उपराज्य मनोज सिन्हा हैं, उन्हें अगस्त 2020 में नियुक्त किया गया था.
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम , 2019 में संशोधन किया है जिससे उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ गई हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 के तहत इन बदलावों को मंजूरी दे दी है, जिसमें उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ाने वाली नई धाराएं शामिल हैं. साथ ही लेफ्टिनेंट गर्वनर के पास अभियोजन के लिए मंजूरी देने और अपील दायर करने की अनुमति देने का भी अधिकार होगा.
इस बदलाव के खिलाफ अब विपक्षी नेताओं का बयान भी आने लगा है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि चुनाव नजदीक है इसलिए ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं. उन्होंने सख्त लहजे में कहा है कि जम्म-कश्मीर के नागरिक शक्तिहीन और रबर स्टैंप मु्ख्य मंत्री से ज्यादा के हकदार हैं. उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि इस फैसले के बाद राज्य के मुख्यमंत्री को एक चराशी की नियुक्ति के लिए भी उप राज्यपाल के पास जाकर भीख मांगनी पड़ेगी.
बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि उमर अब्दुल्ला ने केंद्र के फैसला का विरोध किया है, इससे पहले भी वह कई बार केंद्र सरकार के विरोध में बोलते हुए नजर आए हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्टन ने राज्य में 30 सितंबर तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद चुनाव आयोग और सरकार पर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी के साथ भारतीय चुनाव आयोग ने भी चुनाव कराने को लेकर जरूर निर्देश दिए हैं. इसे लेकर हाल ही में एक बैठक भी की गई थी और 20 अगस्त तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने का निर्णय लिया गया था. वहीं इसी साल पीएम मोदी ने भी कहा था कि राज्य में जल्द ही विधानसभा होंगे और जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेंगे.