बरेली: एक तरफ कश्मीर के पहलगाम में भारतीय लोगों पर धर्म पूछ कर हमला किया जा रहा है. धर्म के नाम पर उनकी जान ली जा रही है तो वहीं उत्तर प्रदेश के बरेली में स्कूल के अंदर राष्ट्रगान तक नहीं गाने दिया जा रहा है. स्कूल की गलती सिर्फ इतनी है कि वो मुस्लिम बस्ती के बीच बसा हुआ है. दरअसल ये पूरा मामला बरेली के एक प्राईवेट स्कूल का है, जहां स्कूल की प्रबंधक शोभना जाहिद डीएम और एसएसपी के पास पहुची थीं. जब शोभना ने अपनी शिकायत इन अधिकारियों को बताई तो अधिकारी भी दंग रह गए. उन्हें ऐसा लगा कि मानो ये शिकायत बरेली नहीं बल्कि पाकिस्तान की है.
शोभना का कहना है कि जामा मस्जिद के पास उनका ब्लूमिंग डेल्स स्कूल है, ये स्कूल केवल 5वीं कक्षा तक है, जहां करीब 400 बच्चे पढ़ते हैं. वैसे तो स्कूल में हर धर्म के बच्चे पढ़ते हैं लेकिन यहां मुस्लिम बच्चों की संख्या थोड़ी ज्यादा है. अपनी शिकायत में शोभना जाहिद ने लिखवाया है कि
"पहलगाम हमले के बाद से ही स्कूल के पड़ौस में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ज्यादा परेशान करना शुरू कर दिया है. ये लोग स्कूल में आते हैं और राष्ट्रगान का विरोध करते हैं. इन लोगों का कहना है कि अगर तुम हमारे इलाके में स्कूल चलाना चाहती हो तो हमारे धर्म के आधार पर स्कूल चलाना होगा. इस स्कूल में राष्ट्रगान नहीं गाया जाएगा. क्योंकि राष्ट्रगान से हमारी नींद खराब हो जाती है, राष्ट्रगान की जगह मुस्लिम नज्म सुनाई जानी चाहिए. इस दौरान वो लोग मशहूर शायर अल्लामा इकबाल की लिखी नज्म ‘लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी’ स्कूल में राष्ट्रगान की जगह पर सुनाई जानी चाहिए".
शोभना का कहना है कि ये लोग पहले भी स्कूल में हंगामा करते थे, लेकिन पहलगाम हमले के बाद इनकी हरकतें काफी बढ़ गई हैं. ये मुस्लिम समुदाय के लोग हर दिन स्कूल के बाहर हंगामा कर रहे हैं. और एक दिन तो स्कूल के अंदर भी ये लोग घुस आए थे. जहां हमें राष्ट्रगान ना पढ़वाने की धमकी दे रहे थे. इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी स्कूल प्रशासन की तरफ से पुलिस को दिया गया है.
लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस के बयान ने पूरे मामले को 360 डिग्री ही घुमा कर रख दिया है. मामला इतना संवेदनशील होने के बावजदूद किला इंस्पेक्टर राजेश मौर्य अलग ही भाषा बोल रहे हैं. इंस्पेक्टर का कहना है कि यहां राष्ट्रगान के विरोध जैसी तो कोई बात है ही नहीं, ये तो आपसी विवाद का ममला है. पुलिस के इस बयान के बाद एक बात समझ में नहीं आ रही कि योगी आदित्यनाथ की सरकार होने के बावजूद पुलिस इस मामले में ऐसा बयान कैसे दे सकती है. कम से कम मामले की जांच तो की जानी चाहिए.