नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता से की गई अपीलों पर तीखा हमला बोला है. राहुल ने दावा किया कि सोना न खरीदने, पेट्रोल कम इस्तेमाल करने, विदेश यात्रा न करने जैसी सलाह असल में सरकार की विफलता को छिपाने की कोशिश है. सोमवार को राहुल गांधी ने कहा कि 12 साल सत्ता में रहने के बाद सरकार अब देश चलाने में असमर्थ हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हर मुश्किल की जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच सकें.
राहुल ने X पर लिखा कि मोदी जी ने जनता से त्याग करने को कहा है, सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने के तेल पर बचत करो, मेट्रो से यात्रा करो और घर से काम करो. राहुल ने इसे ''उपदेश नहीं, नाकामी के प्रमाण'' बताया.
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 11, 2026
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न…
पीएम मोदी की अपील का संदर्भ
रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने एक रैली में कहा था कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल और उर्वरक की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पेट्रोल-डीजल का विवेकपूर्ण उपयोग करें, मेट्रो और कार पूलिंग को बढ़ावा दें, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करें, रेल से सामान भेजें और जहां संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाएं. पीएम ने कहा कि सरकार युद्ध के नकारात्मक प्रभावों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस का जोरदार पलटवार
कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि युद्ध शुरू हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार अभी भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञ दिख रही है. कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि वैश्विक संकट से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाएं बनाने की बजाय आम लोगों को परेशानी में डालना लापरवाही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकता अब सिर्फ चुनाव और छोटी-मोटी राजनीति रह गई है, जिसका नतीजा आर्थिक संकट के रूप में सामने आ रहा है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार को ईंधन के पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने और नागरिकों को किसी तरह की दिक्कत न होने देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. यह पूरा विवाद अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच सामने आया है.