लखनऊ : उत्तर प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर सियासी बहस के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव का एक बयान चर्चा में है. इटावा के सैफई में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अलग-अलग धर्मों की विवाह परंपराओं का उदाहरण देते हुए मुस्लिम समाज में चचेरी बहन से विवाह का जिक्र किया. उन्होंने इसी आधार पर सवाल उठाया कि अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड को किस तरह लागू किया जाएगा.
रामगोपाल यादव ने कहा कि सभी धर्मों के तौर-तरीके और प्रथाएं अलग-अलग हैं. इसी क्रम में उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में चचेरी बहन से शादी को अच्छा माना जाता है, जबकि हिंदू समाज में ऐसी शादी सामान्य तौर पर स्वीकार नहीं की जाती. इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि जब विवाह से जुड़ी परंपराएं अलग हैं तो क्या सभी के लिए एक समान नागरिक कानून लागू किया जा सकता है.
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चचेरे भाई-बहन के बीच विवाह का सवाल व्यक्तिगत कानून और वैधानिक नियमों से जुड़ा विषय है. भारत में अलग-अलग समुदायों के विवाह संबंधी नियम ऐतिहासिक रूप से अलग रहे हैं. यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में समान नियमों की व्यवस्था करना है. उत्तराखंड में यूसीसी के नियम विवाह और तलाक समेत कई नागरिक मामलों के लिए समान प्रक्रियाएं निर्धारित करते हैं.
रामगोपाल यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले युसीसी समेत कई मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज है. उनके बयान का केंद्र यही सवाल रहा कि धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में अंतर होने के बावजूद समान नागरिक कानून किस तरह लागू होगा. उनकी टिप्पणी के बाद चचेरी बहन से विवाह और यूसीसी को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है.