नई दिल्ली : तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के लिए नया सचिवालय और विधानसभा कॉम्प्लेक्स का फैसला अब बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता दिख रहा है. खास बात यह है कि विरोध सिर्फ विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली वाम पार्टियों की तरफ से भी हो रहा है.
विजय सरकार ने चेन्नई के पत्तिनपक्कम स्थित फोरशोर एस्टेट में करीब 25.55 एकड़ जमीन पर नया सचिवालय और विधानसभा परिसर बनाने की योजना बनाई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,200 करोड़ रुपये बताई गई है. सरकार के मुताबिक यहां आधुनिक सुविधाओं वाला नया प्रशासनिक परिसर तैयार किया जाना है.
लेकिन इस फैसले के बाद राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गईं. मछुआरा समुदाय और स्थानीय लोगों ने इलाके में ट्रैफिक, आजीविका और पर्यावरण से जुड़े सवाल उठाए हैं. कई राजनीतिक दल भी मौजूदा जगह बदलने की मांग कर रहे हैं.
सबसे बड़ा झटका CPI(M) की तरफ से आया. पार्टी के प्रदेश सचिव पी. शनमुगम ने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाकर आम सहमति से दूसरी जगह चुनने की मांग की, इसके बाद CPI(M) ने परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन भी किया. पार्टी ने यह चेतावनी भी दी कि अगर सरकार एकतरफा तरीके से फैसले लेती रही तो वह सरकार को दिए जा रहे अपने समर्थन पर दोबारा विचार कर सकती है.
CPI ने भी पत्तिनपक्कम में प्रदर्शन कर मौजूदा स्थान पर परियोजना रोकने और वैकल्पिक जगह तलाशने की मांग की है. उधर DMK प्रमुख एमके स्टालिन ने भी योजना का विरोध करते हुए मछुआरों के आंदोलन में साथ देने की बात कही है. जानकारी के मुताबिक सरकार अब पत्तिनपक्कम के बजाय ECR क्षेत्र में वैकल्पिक स्थानों पर विचार कर रही है, हालांकि अंतिम फैसला अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुआ है.
यानी विजय सरकार के सामने सवाल सिर्फ एक नए भवन का नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर सहमति बनाए रखने और अपने फैसलों को आगे बढ़ाने का भी है.