कोलकाता: क्या ममता बनर्जी अपनी खुद की बनाई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर नियंत्रण खोने जा रही हैं? पार्टी में गहराते संकट के बीच 50 के करीब विधायकों के अलग होने, गुप्त बैठक और पार्टी के आइकॉनिक 'दो फूल' चुनाव चिह्न पर दावा करने की कोशिश की खबरें तेज हो गई हैं.
टीएमसी के निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि करीब 50 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग होकर 'असली तृणमूल कांग्रेस' बनाना चाहते हैं और पार्टी का चुनाव चिह्न हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
मंगलवार को जब ममता बनर्जी कोलकाता के रानी राशमणि एवेन्यू पर धरना दे रही थीं, तब सिर्फ मुट्ठी भर विधायक और सांसद उनके साथ नजर आए. जबकि दावा किया जा रहा है कि 50 विधायकों ने अलग बैठक की थी.
मुख्य विवाद क्या है?
रिजू दत्ता के अनुसार, कई नए विधायक रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाना चाहते थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने सुभाष चट्टोपाध्याय का नाम तय कर दिया. सोमवार शाम को दक्षिण कोलकाता के एक होटल (विवांता) में रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की मौजूदगी में कई टीएमसी विधायकों की बैठक हुई थी. टीएमसी नेता कुणाल घोष ने इसे पार्टी तोड़ने की साजिश बताया, जबकि रितब्रत बनर्जी ने ऐसी किसी संगठित बैठक से इनकार किया है.
क्यों जरूरी हैं 50 से ज्यादा विधायक
पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायक हैं. एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत पार्टी से अलग होकर नई गुट बनाने या चिह्न पर दावा करने के लिए करीब 53 विधायकों (दो-तिहाई) का समर्थन जरूरी है. निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पार्टी में बोलने की कोई जगह नहीं बची है. उन्होंने यहां तक कहा कि "तृणमूल कांग्रेस अब गायब होने की राह पर है, यह पार्टी नहीं बचेगी."
ममता और टीएमसी की चिंता
ममता बनर्जी ने खुद फेसबुक लाइव में कहा कि उनके विधायकों को पुलिस दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है. कुणाल घोष ने भी 'जोड़े हाथ' करके विद्रोही विधायकों से अपील की कि वे गुमराह न हों. अभी तक कोई विधायक सार्वजनिक रूप से 50 की संख्या की पुष्टि नहीं कर रहा है और चुनाव आयोग के पास भी चिह्न पर कोई औपचारिक दावा नहीं किया गया है.
लेकिन फर्जी हस्ताक्षर विवाद, निष्कासन, गुप्त बैठक, बैठक बहिष्कार और खुली नाराजगी ने टीएमसी में भारी संकट का संकेत दिया है. ममता बनर्जी अब न सिर्फ BJP से, बल्कि अपनी ही पार्टी के अंदरूनी विद्रोह से भी जूझ रही हैं. क्या टीएमसी टूट जाएगी? फिलहाल यह सवाल पूरे पश्चिम बंगाल में गूंज रहा है.