उत्तर प्रदेश की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता और बेबाक बयानों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह आने वाले विधानसभा चुनावों में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने किसी पार्टी से चुनाव लड़ने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
एक इंटरव्यू के दौरान शालिनी सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह “दूसरी इंदिरा गांधी नहीं, बल्कि पहली शालिनी सिंह” बनना चाहती हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा मिल रही है।
समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में शालिनी सिंह ने कहा कि उनकी विचारधारा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब तक किसी राजनीतिक दल की विचारधारा उनके विचारों से मेल नहीं खाती, तब तक वह उसके साथ नहीं जा सकतीं।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते भी नहीं हैं और वह केवल चुनाव लड़ने के लिए अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेंगी। इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के साथ उनके जुड़ने की संभावना फिलहाल काफी कम दिखाई देती है।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर शालिनी सिंह ने सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनकी योगी आदित्यनाथ से कभी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन उत्तर प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की वह सराहना करती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में भाजपा की सरकार तीसरी बार भी वापसी कर सकती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी शालिनी सिंह ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को राजनीति में पर्याप्त अवसर मिले हैं और उन्हें अपनी क्षमता साबित करने के लिए विरासत से आगे बढ़कर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में सफलता केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं मिलती।
इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि बृजभूषण शरण सिंह अपनी बेटी को सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि इस तरह की चर्चाओं को कई बार खारिज भी किया जा चुका है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार शालिनी सिंह हाल के दिनों में नोएडा क्षेत्र में काफी सक्रिय दिखाई दी हैं। इसी वजह से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में नोएडा सीट से दावेदारी पेश कर सकती हैं। हालांकि इस सीट पर वर्तमान में भाजपा नेता और विधायक पंकज सिंह का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में इस सीट को लेकर कोई राजनीतिक खींचतान होती है तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल शालिनी सिंह के बयानों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि वह अपनी राजनीतिक पहचान को लेकर स्पष्ट सोच रखती हैं और खुद को किसी भी स्थापित राजनीतिक छवि के बजाय अपनी अलग पहचान के साथ देखना चाहती हैं।