कानपुर की बकरा मंडी में हुए विवाद के बाद समाजवादी पार्टी विधायक नसीम सोलंकी और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि इरफान सोलंकी के साथ पहुंचे लोगों ने रंगदारी वसूली, मारपीट और लूटपाट की। सबसे गंभीर आरोप विधायक नसीम सोलंकी के गनर अजीम अहमद पर लगे हैं।
व्यापारियों का दावा है कि गनर अजीम अहमद ने करीब पौने तीन लाख रुपये से भरा बैग लूट लिया। मामला सामने आने के बाद अजीम अहमद को सस्पेंड कर दिया गया है। लेकिन अब इस पूरे विवाद ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि विधायक नसीम सोलंकी की सुरक्षा में तैनात गनर इरफान सोलंकी के साथ आखिर क्यों मौजूद था। लोगों का कहना है कि सरकारी सुरक्षा किसी जनप्रतिनिधि को व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए दी जाती है, न कि परिवार के अन्य सदस्यों के उपयोग के लिए।
कानूनी जानकारों के मुताबिक किसी विधायक या वीआईपी को मिला पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर केवल उसी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए तैनात होता है। सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति अपनी सुरक्षा किसी दूसरे व्यक्ति को “उधार” नहीं दे सकता। ऐसा करना सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की श्रेणी में माना जाता है।
नियमों के अनुसार यदि सुरक्षा के दुरुपयोग की शिकायत मिलती है तो थ्रेट परसेप्शन कमेटी सुरक्षा वापस लेने या कम करने की सिफारिश कर सकती है। इसके अलावा पुलिस कमिश्नरेट या गृह विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है।
कुछ मामलों में परिवार को दी गई अतिरिक्त सुरक्षा का खर्च जनप्रतिनिधि से वसूला भी जा सकता है। यदि मामला गंभीर अपराध या सरकारी संसाधनों के जानबूझकर दुरुपयोग से जुड़ा पाया जाता है तो प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत जांच की संभावना भी बन सकती है।
वहीं गनर अजीम अहमद पर विभागीय कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है। पुलिस नियमों के मुताबिक बिना आधिकारिक आदेश के ड्यूटी बदलना अनुशासनहीनता और लापरवाही माना जाता है। ऐसे मामलों में पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू की जाती है और उसे वीआईपी ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन भेजा जा सकता है।
फिलहाल अजीम अहमद को सस्पेंड किया जा चुका है और आगे की जांच जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में विधायक नसीम सोलंकी के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई होती है या नहीं।