राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के रूस दौरे की तस्वीरें इस वक्त दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर आयोजित एक बड़ी बैठक में भारत की ओर से पहुंचे डोभाल ने वैश्विक राजनीति, आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा को लेकर तीन बड़ी नसीहत दीं, जिसे कई देश सीधे तौर पर पाकिस्तान और अमेरिका की नीतियों से जोड़कर देख रहे हैं।
बैठक के दौरान एक तस्वीर ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। मॉस्को के स्पेस सेंटर में रखी सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन की ऐतिहासिक कार को अजीत डोभाल काफी देर तक देखते रहे। यह वही खास सेडान कार है जिसे सोवियत सरकार ने 1961 में यूरी गागरिन को गिफ्ट किया था। आज भी इसे खास मेहमानों को ही दिखाया जाता है।
लेकिन इस दौरे में सबसे ज्यादा चर्चा डोभाल के उन बयानों की हो रही है, जो उन्होंने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिए।
डोभाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी संस्थाओं में अब पहले जैसी ताकत नहीं बची है कि वे दुनिया की बड़ी समस्याओं का समाधान कर सकें, इसलिए उनमें सुधार और बदलाव जरूरी हो चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग कभी बंद नहीं होने चाहिए। इन रास्तों से वैश्विक व्यापार चलता है और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इससे जुड़ी हुई है।
इसके अलावा डोभाल ने आतंकवाद पर दोहरे रवैये को लेकर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि जो देश आतंकियों को पालते हैं, उन्हें अब तय करना होगा कि वे आतंकवाद के साथ खड़े हैं या उसके खिलाफ। माना जा रहा है कि उनका इशारा सीधे पाकिस्तान की ओर था।
डोभाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस और अफगानिस्तान के बीच बड़ी रक्षा डील की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रूस अफगानिस्तान को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है। इसे पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भारत और अफगानिस्तान के अच्छे संबंधों की वजह से इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं पाकिस्तान लगातार अमेरिका के करीब रहने की कोशिश कर रहा है, लेकिन रूस में हुई इस बैठक ने अमेरिका की चिंता भी बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया इस समय तेजी से बदलते वर्ल्ड ऑर्डर के दौर से गुजर रही है। अमेरिका, रूस, चीन और भारत के बीच बढ़ती कूटनीतिक हलचल आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती है।
इसी वजह से डोनाल्ड ट्रंप की हालिया विदेश नीति, चीन और रूस के साथ बढ़ते संवाद और वैश्विक तनाव को भी नए समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है। अब सवाल यही है कि आने वाले समय में दुनिया का नेतृत्व किस दिशा में जाएगा और क्या अमेरिका की वैश्विक पकड़ पहले जैसी बनी रह पाएगी या नहीं।